
आरक्षण से बदलेगा चुनावी गणित (फोटो सोर्स- AI)
Bhilai Municipal Election: नगर निगम चुनाव से पहले वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस बार निगम में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित पार्षद सीटों की संख्या 18 से बढ़कर 23 होने की संभावना है।
ओबीसी की आबादी 32 प्रतिशत पाए जाने के बाद यह बदलाव किया जा रहा है। वहीं, महापौर पद पहले ही ओबीसी के लिए आरक्षित हो चुका है। ऐसे में वार्डों में ओबीसी आरक्षण बढ़ने का सीधा असर महापौर पद के दावेदारों और राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति पर पड़ेगा। जिला प्रशासन ने आरक्षण प्रक्रिया के लिए निगम से वार्डों से संबंधित आवश्यक जानकारी और दस्तावेज मंगा लिए हैं। निगम की ओर से जानकारी भेजी जा चुकी है और अब आरक्षण की तारीख तय होने का इंतजार है। प्रशासनिक स्तर पर 15 सितंबर से पहले वार्डों का आरक्षण किए जाने की उम्मीद है।
महापौर पद ओबीसी के लिए आरक्षित होने और वार्डों में भी ओबीसी की हिस्सेदारी बढ़ने से इस वर्ग के नेताओं की दावेदारी मजबूत होगी। राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के सामने पहले महापौर पद के लिए मजबूत चेहरा चुनने और उसके बाद वार्डवार प्रत्याशियों का चयन करने की चुनौती होगी। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद होने वाला यह पहला नगरीय चुनाव होने के कारण राजनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
प्रस्तावित आरक्षण व्यवस्था में कई वार्डों की श्रेणी बदलने की स्थिति बन रही है। सेक्टर-4 पश्चिम वार्ड-58 वर्तमान में एसटी महिला के लिए आरक्षित है, जबकि सेक्टर-3 का वार्ड-52 ओबीसी वर्ग में है। जुनवानी वार्ड-1 सामान्य है, जिसे एससी के लिए आरक्षित किए जाने की तैयारी है। नेहरू नगर वार्ड-4 का एससी आरक्षण हटाया जा सकता है।
इसी तरह कोसा नगर वार्ड-5 को सामान्य से एससी, प्रियदर्शिनी परिसर वार्ड-6 और वार्ड-10 के मौजूदा एससी आरक्षण को बदलने की तैयारी है। राजीव नगर वार्ड-9, जो वर्तमान में सामान्य महिला है, उसे एससी के लिए आरक्षित किए जाने की चर्चा है। इन बदलावों का असर अन्य वार्डों की आरक्षण श्रेणी पर भी पड़ेगा। यही वजह है कि आरक्षण की अंतिम सूची जारी होने से पहले ही पार्षदों और राजनीतिक दलों में हलचल बढ़ गई है।
प्रस्तावित बदलावों के विरोध में 25 से अधिक पार्षदों ने कलेक्टर और निगम आयुक्त से शिकायत की है। उनका कहना है कि वर्ष 2011 के बाद जनगणना नहीं हुई है और इस बार वार्डों का परिसीमन भी नहीं किया गया है। ऐसे में एससी और एसटी वर्ग के लिए पहले से आरक्षित वार्डों की श्रेणी बदलने पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकार अली हुसैन सिद्दीकी का कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर आरक्षण किया जा रहा है। नई जनगणना और परिसीमन के अभाव में एससी-एसटी आरक्षित वार्डों को बदलना नियमों के अनुरूप नहीं होगा।
अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की सिफारिश पर कराए गए सर्वेक्षण में भिलाई निगम क्षेत्र में ओबीसी आबादी 32 प्रतिशत पाई गई है। इसी आधार पर ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी है। वर्तमान व्यवस्था में ओबीसी के 18 वार्ड आरक्षित थे, जिन्हें बढ़ाकर 23 किया जा रहा है। इससे ओबीसी वर्ग के पांच पार्षद बढ़ेंगे।
Updated on:
29 Aug 2026 01:16 pm
Published on:
29 Aug 2026 01:16 pm
