
भिलाई. चरोदा पथर्रा गांव के जिस कुएं से पुरानी भिलाई पुलिस को वर्ष 2009 में नक्सलियों के हथियारों का जखीरा मिला था। उसी कुएं में मछली मारने के दौरान गांव के ही एक युवक को देशी कट्टा और 100 जिंदा कारतूस मिले थे। युवक ने पुलिस को इसकी सूचना तक नहीं दी थी और 10 सालों से इन्ही हथियारों के दम पर लोगों को डराता-धमकाता और खौफ पैदा करने हवाई फायरिंग करता था। देशी कट्टा और कारतूस को बेचने की फिराक में था कि आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
युवक के पास से नक्सलियों के छिपाए हथियार मिलने से पुलिस के कान खड़े हो गए हैं। अब यह पता किया जा रहा है कि युवक के तार कहीं माओवादियों से तो नहीं जुड़े हैं। इस मामले की जांच के लिए पुलिस स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन करेगी। आम्र्स एक्ट के तहत कार्रवाई कर आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। दुर्ग शहर एएसपी शशिमोहन सिंह और ग्रामीण एएसपी डीआर पोर्त ने रविवार को सेक्टर-६ स्थित कंट्रोल रूम में पत्रवार्ता के दौरान इस मामले का खुलासा किया।
एएसपी सिंह ने बताया कि पुलिस मित्र से सूचना मिली थी कि चरौदा के गणेशपारा निवासी रविन्द्र साहू उर्फ बठुआ देशी कट्टा दिखाकर लोगों को डराता, धमकाता है और हवाई फायरिंग कर रौब दिखाता है। वहीं सूचना थी कि आरोपी अपने पास रखे कट्टा और कारतूस को बेचना चाहता है और ग्राहक तलाश रहा है। आरोपी ने बताया कि वर्ष 2009 जून में चरौदा बस्ती वालों की सूचना पर पुलिस ने चरौदा, पथर्रा के बीच श्मशान घाट स्थित कुएं से बड़ी संख्या में नक्सलियों द्वारा छिपाए गए कारतूस एवं कट्टा जब्त किए थे।
उस घटना से पहले ही रविन्द्र उसी कुएं में मछली मारने गया था, जहां उसे कट्टा और कारतूस मिले थे। रविन्द्र ने इन हथियार को पुलिस को सौंपने की बजाय अपने पास रख लिया था। आरोपी ने यह राज खोला तो पुलिस के कान खड़े हो गए, क्योंकि शहर में पहले भी माओवादियों की मौजूदगी और मददगारों की सक्रियता के मामले सामने आ चुके हैं। आरोपी जो कहानी बता रहा है, उस पर पुलिस को संदेह है। इसलिए हर एंगल से मामले की जांच होगी।
पुलिस ने तस्दीक की तो पता चला कि आरोपी पुराना गुंडा, बदमाश है। एक जवान को ग्राहक बनाकर उसके पास भेजा गया। इस बीच गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 1 नग देशी कट्टा, 315 बोर का 75 नग कारतूस, 7.62 एसएलआर 5 नग कारतूस, 9 एमएम स्टैनगन के 19 नग और 455 बोर के 1 नग कारतूस मिले। कुल १०० कारतूस बरामद हुए। इसकी कीमत 80 हजार रुपए आंकी गई है। आरोपी ने इन हथियारों को घर के पटाव में सीमेंट बोरी के थैले में छिपा रखा था। एएसपी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ थाना में मारपीट, हत्या का प्रयास एवं गुण्डागर्दी का मामला पहले से ही दर्ज है।
जांच के यह बिंदु
पुलिस को कुएं से नक्सलियों के हथियारों का जखीरा मिला था। आरोपी को पुलिस के पहले ही हथियार मिले थे पर उसने पुलिस को इसकी सूचना किस वजह से नहीं दी। कुएं से एक बार हथियार बरामद करने के बाद आरोपी ने दोबारा वहां खोजबीन की होगी? और भी हथियार मिले होंगे। कहीं आरोपी ने कुछ हथियारों को बेच तो नहीं दिया। इन बिंदुओं पर भी पुलिस जांच में जुट गई है।
महिला नक्सली की हुई थी गिरफ्तारी
सुपेला थाना क्षेत्र के फ रीद नगर से एक महिला नक्सली को गिरफ्तार किया गया था। वह महिला नक्सलियों के शहरी नेटवर्क से लंबे समय से जुड़ी हुई थी। खबर मिलने पर उसे पुलिस ने गिरफ्त में लेकर कार्रवाई की थी।
एनकाउंटर
शहर से नक्सलियों के नेटवर्क का संचालन करने वाली दंपती का पुलिस को सुराग मिला था। पुलिस ने जामुल थाना क्षेत्र में उस समय महिला नक्सली मालती और उसके पति को एनकाउंटर में मार गिराया था।
पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार
भिलाई निवासी महिला वकील रेखा पगरनिहा के पति दीपक परगनिहा को नक्सली गतिविधियों में शामिल होने और उसे मदद करने के आरोप में एनआईए की टीम ने पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था। उस दौरान शहर से नक्सली संगठनों के तार जुड़े होने की चर्चा भी आम थी।
मिले थे डेटोनेटर
2014 में शिवनाथ नदी में करीब डेढ़ सौ की संख्या में डेटोनेटर मिले। ये गिट्टी खदानों में उपयोग किए जाने वाले डेटोनेटर जैसे थे, लेकिन इसके संबंध विघटनकारी तत्वों से हो सकता है। क्योंकि खदानों में उपयोग किए जाने वाले डेटोनेटर इस तरह से नहीं फेंके जाते। उसे नदी किनारे मिट्टी के भीतर छुपाकर रखे गए थे। इस मामले में भी पुलिस कोई खास जांच नहीं कर पाई थी।
२ जून 2009 में भिलाई तीन थाना चरोदा मुक्तिधाम के समीप खेत पर स्थित कुएं में 12 बोर बंदूक के कारतूस मिले थे। चौथे दिन पथर्रा के ही खार के एक तालाब में भी कारतूस मिले। दोनों जगहों में कुल करीब 1952 कारतूस बरामद किए गए थे। ये कारतूस भी आर्डिनेस फैक्ट्री के थे। तात्कालीन टीआई राजेश जोशी ने बताया कि कुएं में मछली मारते समय बोरे में बंद हथियार मिले थे। मछुआरे बोरे को घर ले गए थे। घर में बोरे को खोलकर देखने पर कारतूस होने के बाद मछुआरों ने उसे तालाब में छिपा दिए थे। जिसे बाद में बरामद किया