
भिलाई/दुर्ग. डेंगू को लेकर जिम्मेदार गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। शुक्रवार को ही प्रदेश के मुख्य सचिव अजयसिंह किसी तरह की लापरवाही न करने की हिदायत देकर गए और इधर एक बड़ी लापरवाही फिर सामने आ गई। डेंगू पीडि़त एक बच्ची को जिला अस्पताल से लौटा दिया गया। सुभाष नगर निवासी आयुशी सिन्हा (९ वर्ष) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में डेंगू पॉजेटिव आया है। परिवार के सदस्य आयुशी को उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे।
जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बोलकर लौटा दिया कि मरीज की देखभाल घर में करें। आयुशी के पिता रमेश सिन्हा ने बताया कि उसकी बेटी आयुशी को ३ दिन से बुखार आ रहा है। शुक्रवार को उसे पोटिया स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लेकर गया था। वहां के डॉक्टर ने जांच करने के बाद डेंगू होने की जानकारी दी। जिला अस्पताल भेजा। यहां डॉक्टर ने यह कहते हुए घर ले जाने की सलाह दी कि अभी बच्ची ठीक है। उल्टी होने या बुखार बढऩे पर ही वे भर्ती लेंगे। इसके बाद वे लौट गए।
मुख्य सचिव ने दिखाए तल्ख तेवर
45 मिनट तक जिला प्रशासन, नगर पालिक निगम, स्वास्थ्य विभाग और बीएसपी के अधिकारियों बैठक ली। उन्होंने सीधा सवाल किया कि आखिर शहर में डेंगू कैसे फैल गया। मुख्य सचिव के तल्ख तेवर देखकर सपकाए अफसर जवाब नहीं दे पाए। वे बगलें झांकने लगे।
एक दूसरे पर टालते रहे- निगम के अधिकारियों ने कहा कि सबसे पहले टाउनशिप में डेंगू का मरीज मिला। बीएसपी के अफसरों ने कहा कि डेंगू सबसे पहले निगम के वार्ड क्षेत्र में फैला। अधिकारियों के इस तरह के जवाब से नाराज हो गए सीएस।
अस्पतालों में जगह नहीं
डेंगू का प्रकोप बढ़ते जा रहा है। अब पूरा शहर डेंगू की गिरफ्त में आ गया है। सभी छोटे-बडे अस्पतालों में पैर रखने तक की जगह नहीं है। डॉक्टर अब गंभीर केस वाले मरीजों को ही दाखिल कर रहे हैं। डेंगू एनएस-1 वाले मरीजों को दवाई देकर घर पर ही आराम करने की समझाइश दे रहे हैं। ताकि अस्पतालों में स्थिति संभाली जा सकें। शहर के प्रमुख चार अस्पतालों के अलावा वार्डों में लगे स्वास्थ्य शिविर और मोबाइल कैंप में भ्ज्ञी मरीजों की भीड़ बढऩे लगी है।
जिन केन्द्रों में महीने भर तक गिनती के लोग इलाज कराने पहुंचते थे, आज वहां ओपीडी का आंकड़ा ढाई सौ से पार पहुंच रह है। पत्रिका की टीम ने जब पटरीपार के सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों का जायजा लिया तो पाया कि बुखार हो या सदी, खांसी हर केन्द्र में मरीज पहुंच रहे हैं और सबसे पहले ब्लड टेस्ट ही करा रहे हैं। इन सेंटर्स में रैपिड किट की व्यवस्था होने की वजह से मरीजों को तत्काल डेंगू के पॉजीटिव होने की जानकारी मिल रही है, लेकिन ज्यादा सुविधा नहीं होने की वजह से अस्पताल में दाखिल करने की बजाए उन्हें तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। ताकि समय पर प्लेटलेट्स काउंट हो सके।
खुर्सीपार - खुर्सीपार के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में शुक्रवार की सुबह से ही मरीजों की कतार लगी रही। दोपहर करीब 12 बजकर 45 मिनट तक ढाई सौ से ज्यादा मरीज ओपीडी में पहुंच चुके थे। इसमें से डेंगू के लक्षण वाले 42 मरीजों का रैपिड टेस्ट किया गया। जिसमे से 18 पॉजीटिव थे। अस्पताल की प्रभारी डॉ सोनिका चौरसिया ने बताया कि पिछले 7 दिनों में डेंगू के 54 पॉजीटिव मरीज सामने आए हैं। जिसमें गंभीर केस को जिला अस्पताल रेफर किया गया। शुक्रवार को यहां से 7 केस जिला अस्पताल भेजे गए।
सुपेला अस्पताल - सुपेला लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में आमतौर पर 450 लोग प्रतिदिन ओपीडी में आते हैं। शुक्रवार को संख्या करीब 700 पहुंच गई। 151 लोगों के ब्लड सैंपल लिए गए, जिनमें 30 डेंगू पॉजीटिव मिले। गंभीर मरीजों को जिला व निजी अस्पताल जाने की सलाह डॉक्टरों ने दी।
छावनी स्वा. केन्द्र - छावनी के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में दोपहर डेढ़ बजे तक डेंगू संभावितों के 2५ सेंपल लिए जा चुके जिसमें 15 पॉजीटिव केस सामने आए। प्रभारी डॉ आरके सक्सेना ने बताया कि दो दिनों में यहां 9 और मरीज पॉजीटिव मिले थे जिन्हें सभी को सुपेला और जिला अस्पताल भेज दिया गया।
बैंकुठधाम अस्पताल - बैंकुठधाम प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के पैथोलॉजी में टेक्नीशियन नहीं होने की वजह से सीएम मेडिकल कॉलेज से स्टाफ को भेजा गया। इन्होंने दिनभर में 51 सेंपल लिए जिसमें से 9 केस पॉजीटिव थे। यहां भी पिछले दो दिनों से रैपिड किट पर डेंगू का टेस्ट किया जा रहा है। इस क्षेत्र में मरीज बढ़ते जा रहे हैं।
टेक्नीशिन को आ गया हार्ट अटैक
लाल बहादुर शास्त्री शासकीय अस्पताल में ब्लड जांच कराने वालों की भीड़ रही। यहां करीब 700 लोग ओपीडी में आए थे जिन्हें देखने के बाद डॉक्टर ने 151 लोगों के ब्लड सैंपल जांचने कहा। गुरुवार देर रात तक ब्लड टेस्ट करने के बाद कर्मियों को शुक्रवार की सुबह से फिर बुला लिया गया था।
काम के दबाव में लैब टेक्नीशियन विनोद देशमुख को चक्कर आ गया। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें माइनर हार्ट अटैक आया है। एक अन्य टेक्रीशियन रेणुमाला कुमार को भी चक्कर आ गया। उसे भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद ब्लड टेस्ट करने तत्काल जिला अस्पताल दुर्ग टेक्रीशियन बुलाया गया।
डेंगू से १० मौत पर सीएस से १० सवाल, नहीं मिला जवाब
१. डेंगू से१० लोगों की जान चली गई इसके लिए जिम्मेदार कौन है।
२. बीमारी फैलने के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
३.आखिर डेंगू ने इतना विकराल रूप कैसे लिया।
४. रोकथाम करने में प्रशासनिक तंत्र विफल क्यों हुआ।
५.मरीज तो बढ़ते जा रहे हैं,रोकथाम के कारगर उपाय क्यों नहीं किए गए।
६.डेंगू को रोकने के लिए अब क्या जिम्मेदारी तय की गई।
७. डेंगू फैलने व रोकने के बारे में अधिकारियों ने क्या बताया।
८. शुरुआत में ही प्रशासन ने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई।
९. रूटीन में भी एंटी लार्वा अभियान क्यों नहीं चलाया।
१०.बीमारी फैलने के बाद भी सफाई व्यवस्था लचर क्यों है।
चीनी इंजीनियर डेंगू के शिकार
भिलाई इस्पात संयंत्र में आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण परियोजना के तहत निर्मित नई इकाई स्टील मेल्टिंग शॉप-3 को शुरू करने आए चीन के पांच इंजीनियर भी डेंगू का शिकार हो गए हैं। ये सभी सूर्यविहार कालोनी में रह रहे थे।पीडि़तों को राजधानी रायपुर के एक निजी हॉस्पिटल में दाखिल किया गया। जहां चार को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। वहीं एक इंजीनियर झू है हांग अभी भी अस्पताल में ही स्वास्थ्य लाभ ले रहा है।
बताया गया कि चीन से करीब 30 इंजीनियरों को दल आया हुआ है। इनमें से अधिकांश को बुखार आने लगा। ब्लड जांच में पांच को डेंगू पॉजीटिव आने पर सभी को तुरंत रायपुर के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चीनी मेहमानों के डेंगू की चपेट में आने की खबर से प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
यूआरएम के कर्मचारी डेंगू से पीडि़त, उत्पादन पर असर
बीएसपी के यूआरएम में सबसे अधिक कर्मचारी डेंगू से पीडि़त हुए हैं। जिसमें से कुछ कर्मचारियों को हॉस्पिटल में दाखिल किया गया है, कुछ को घर में रहकर प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए उपाय बताकर रवाना किया गया है। इससे हर शिफ्ट में पूरे कर्मचारी पहुंंच नहीं पा रहे हैं।