भिलाई

आश्चर्य किंतु सत्य : बिना तारों के जलेगा बल्ब, वाई-वाई की तरह होगी बिजली

वाई-फाई की तरह काम करेगा। यानि बिजली के तारों की झंझट खत्म हो जाएगी। फिलहाल प्रोजेक्ट प्राइमरी फेज में है।

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May 10, 2018
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भिलाई . आप सोचते होंगे, काश... घर में लगे बल्ब, ट्यूब लाइट, पंखे सरीखे तमाम उपकरण क्यों न बिजली के तारों के बिना वाईफाई की तरह चलें? आप ठीक सोचते हैं, ऐसा मुमकीन भी है। शंकराचार्य टेक्नीकल कैम्पस(एस-१) के तीन छात्रों ने इस सोच को तकनीक में बदला है। एक ऐसी डिवाइस तैयार की है, जो तारों के बिना भी उपकरणों को बिजली मुहैया करा सकती है। इस डिवाइस को इलेक्ट्रिकल ८वें सेमेस्टर के छात्र अमनदीप सिंह फ्लोरा, एस विनय कुमार, आकांक्ष तिकी ने एक्सपर्ट गाइड सिमरदीप कौर के मार्गदर्शन में तैयार किया है। छात्रों ने बताया कि यह डिवाइस एक तरह के वाई-फाई की तरह काम करेगा। यानि बिजली के तारों की झंझट खत्म हो जाएगी। फिलहाल प्रोजेक्ट प्राइमरी फेज में है। तीनों छात्र और गाइड इसे और बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं।

बिजली की चोरी पर लगेगा अंकुश
छात्रों ने बताया कि इस डिवाइस को यदि बड़े लेवल पर तैयार किया गया तो इससे बिजली चोरी पर लगाम लगेगी। लोग बिजली के तारों पर कटिया नहीं मार पाएंगे, क्योंकि तार होंगे ही नहीं। पूरा सिस्टम एक तरह के वाई-फाई की तरह काम करेगा। बिजली विभाग इससे लाखों रुपए की बचत कर पाएगा। यह भी एक तरह का ट्रांसफार्मर ही है, जिसे लोगों के घर के आसपास लगाना होगा। आम ट्रांसफार्मर की तरह दिखने वाला यह टेसला क्वाइल खास होगा।

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आखिरी कैसे जल उठेंगी लाइटें
छात्रों ने बताया कि इस डिवाइस के जरिए पॉवर को कनवर्ट किया जाएगा। एक टेसला क्वाइल ट्रांसफार्मर ६ से ८ घरों के बीच लगाया जा सकेगा। एक ट्रांसफार्मर से वायरलेस करंट घरों में लगी लाइटों को जलाएगा। छात्रों के मुताबिक यह डिवाइस मैग्नेटिक फिल्ड के कॉन्सेप्ट पर आधारित है। इस डिवाइस के निर्माण में कॉपर वायर और ग्लास बॉटल का उपयोग किया गया है।

पूरा सिस्टम मैैग्नेटिक फील्ड पर आधारित
इस डिवाइस में दो क्वाइल है। पहला प्राइमरी और सेकंडरी। यह दोनों ही ग्लास बॉटल से तैयार किए गए कैपेसिटर से जुड़े हैं। प्राइमरी क्वाइल और कैपेसिटर एयर गैप की वजह से कार्य करते हैं। इस एयर गैप में कैपेसिटर के चार्जिंग और डिस्चार्जिंग से बिजली एनर्जी जनरेट होती है। यह चार्ज और डिस्चार्ज फंक्शन ऑफ सेकंड में होता है। इस तरह हाई फ्रिक्वेंसी वोल्टेज से सीएफएल या ट्यूब लाइट बिना तारों के जल उठती है।

शोध में करेंगे मदद
डॉ.पीबी देशमुख, डायरेक्टर,शंकराचार्य टेक्निकल कैम्पस,भिलाई ने बताया कि अभी बिजली को तारों के जरिए पहुंचाने में करीब ५० फीसदी एनर्जी का लॉस होता है। छात्रों ने एक आइडिया पर काम किया है। उन्हें सक्सेस मिली है। वायरलेस तरीके से बिजली पहुंचाना एक बढिय़ा कॉन्सेप्ट है। छात्रों को इसे आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।

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Published on:
10 May 2018 10:34 pm
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