भिलाई

Chhattisgarh Public Opinion: चारधाम की यात्रा के लिए शहरवासियों को चाहिए सीधी ट्रेन, चलाया हस्ताक्षर अभियान

साप्ताहिक टे्रनों को नियमित और नई ट्रेन की सुविधा शुरू करने की मांग को लेकर रविवार को भिलाई में प्रदेश के चार शहरों के लोग जुटे।
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Jan 21, 2018
Indian railway

भिलाई. साप्ताहिक टे्रनों को नियमित और नई ट्रेन की सुविधा शुरू करने की मांग को लेकर रविवार को भिलाई में प्रदेश के चार शहरों के लोग जुटे। आंधप्रदेश उत्कल संघर्ष समिति के बैनर तले दुर्ग से आंध्र प्रदेश के विजय नगरम के बीच नई एक्सप्रेस चलाने की मांग को लेकर पावर हाउस चौक पर धरना प्रदर्शन कर हस्ताक्षर अभियान चलाकर 435 लोगों के समर्थन जुटाए।

ज्ञापन रेलवे मंत्री को सौंपा जाएगा

लोगों के हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन केन्द्रीय रेलवे मंत्री पीयूष गोयल को सौंपा जाएगा। साप्ताहिक टे्रनों को नियमित, लंबी दूरी के टे्रनों में पेंट्रीकार की सुविधा को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया। वहीं लोगों ने मांग पूरी नहीं होने पर समिति के बैनरतले उग्र आंदोलन करने की बात भी कही है। हस्ताक्षर अभियान का पार्षद पी श्रीनिवास राव, जे श्रीनिवास राव, एल्डरमैन बी सुग्रीव, वाई अप्पल स्वामी सहित महिलाओं ने समर्थन किया।

4 महीने पहले बंद की पैसेंजर

समाज के जनरल सेके्रटरी डिलेश्वर राव का कहना है कि दुर्ग से विशाखा पट्टनम वाल्टेयर पैसेंजर टे्रन (५८५२९/५८२३०)चलती थी। इसे बंद कर दिया है। ट्रेन की सुविधा बंद हो जाने से लोगों को परेशानी हो रही है।

यह हैं और मांगें
- बिलासपुर पुणे एक्सप्रेस १२४८९ को साप्ताहिक से नियमित किया जाए।
- बिलासपुर से बंगलुरु जाने वाली वैनगंगा एक्स्प्रेस १२२५ भी नियमित हो।
- गरीब रथ १२५३६ को सप्ताह में दो दिन बजाय नियमित दुर्ग से चलाया जाए।
- दुर्ग से गोरखपुर के बीच सीधी नई एक्सप्रेस चलाई जाए।
- दुर्ग से गोरखपुर तक चलाया जाए।लंबी दूरी के टे्रनों में पेंट्रीकार लगाने की मांग की।
- दुर्ग से पलासा ब्रह्मपुर तक वाया विजयनगरम नई एक्सप्रेस शुरू की जाए।

पत्रिका के अभियान से जुड़े लोग
पत्रिका ने दुर्ग रेलवे स्टेशन, चारों धाम, इंदौर, गोरखपुर, बंगलुरु के बीच टे्रन सेवा को लेकर समाचार प्रकाशित की है। साप्ताहिक टे्रनों को नियमित और लंबी दूरी के टे्रनों में पेंट्रीकार की सुविधा को लेकर अभियान चलाया है। इस मामले में दुर्ग लोक सभा सांसद ताम्रध्वज साहू ने पूर्व रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु को पत्र भी लिखा था। संसद में मामला भी उठाया था। इसके बाद मांग पूरी नहीं हुई। इसके बाद पत्रिका ने फिर से मामले को उठाया है। विभिन्न सामाजिक संगठन और आंध्र प्रदेश उत्कल संघर्ष समिति के लोग भी सामने आए हैं।

Published on:
21 Jan 2018 09:19 pm