भिलाई

सिर्फ कागजों के पन्ने नहीं जले, अरमान भी हुए राख: दसवीं की छात्रा का छलका दर्द, कहा- कैसे करूंगी एग्जाम की तैयारी

Bhilai News: सेक्टर-9 अस्पताल के पास झोपड़ियों में गुरुवार रात करीब 2 बजे आग लग गई। इनमें रह रहे लोगों ने आग और धुआं देखा तो आशियाना छोड़कर भागे। सिलेंडर फटने लगे तो बचे मकानों में तेजी से आग फैल गई। स्कूल में पढ़ने वाले सभी नोट्स और कॉपी किताबें जलकर राख हो गई।
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Feb 18, 2023
 बच्चों के कॉपी किताब जले
बच्चों के कॉपी किताब जले

Bhilai News: रात दो बजे आग की सूचना मिलते ही दमकल की टीम मौके पर पहुंची। आग पर नियंत्रण पाने में दो घंटे लग गए। लेकिन तब तक इन झोपड़ियों का सारा सामान जलकर खाक हो चुका था। सूचना मिलते ही भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव(MLA Devendra Yadav) व मेयर नीरज पाल जायजा लेने पहुंचे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय व एमआईसी सदस्य सीजू एंथोनी भी पीड़ितों से मिले। दुर्ग सांसद विजय बघेल, कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा व भिलाई निगम आयुक्त रोहित व्यास समेत अन्य ने भी जायजा लिया। मामला भिलाई(Bhilai) का है।

सेक्टर-9 अस्पताल(Sector-9 Hospital) के पास झोपड़ियों में गुरुवार रात करीब 2 बजे आग लग गई। इनमें रह रहे लोगों ने आग और धुआं देखा तो आशियाना छोड़कर भागे। सिलेंडर फटने लगे तो बचे मकानों में तेजी से आग फैल गई। भागने के क्रम में लोगों की गृहस्थी छूट गई। बचत के पैसे, कपड़े, गृहस्थी का सामान और उन बच्चों की किताबें भी जल गईं, जिनकी परीक्षाएं अगले कुछ दिनों में होने वाली है।

आगजनी का शिकार हुए इन पीड़ितों के लिए शासन-प्रशासन(Government) ने भले ही ठहरने, भोजन, पानी और कपड़ों की व्यवस्था कर दी हो लेकिन इनकी मायूसी अब तक नहीं हटी। स्कूल में पढ़ने वाले सभी नोट्स और कॉपी किताबें जलकर राख हो गई। इस बस्ती में रहने वाले बच्चे स्कूल में पढ़ने के लिए जाया करते थे। 10वीं कक्षा में अध्ययनरत एक छात्रा का कहना है कि कुछ दिनों के बाद बोर्ड एग्जाम शुरू हो जाएंगे। इस भीषण आग में उनके कपड़े, सामान और कापी, पुस्तकें तक जल गईं हैं। ऐसे में वो कैसे अपने एग्जाम की तैयारी करेंगी।

इसी बस्ती में रहने वाली निर्जला(Nirjala) ने बताया कि वह 10वीं की छात्रा हैं। उसकी सारी किताबें और नोट्स आग में जल गए हैं। इस वजह से उसे पढ़ाई की टेंशन हो गई है। वह इस बात को लेकर चिंतित है कि वह अपनी बोर्ड एग्जाम की तैयारी कैसे करेगी। उनके पास न तो रहने के लिए घर है और न ही खाने के लिए भोजन। उनके पास पहनने तक के लिए कपड़े और चप्पल नहीं है। ऐसे में वह चिंतिति है कि इस हालत में उसका कर उसके परिवार का क्या होगा।

निर्जला(Nirjala) ने बताया कि वह पुलिस ऑफिसर बनना चाहती हैं। उसने शासन प्रशासन से मांग की कि मेरे टीचर मुझे नोट्स और किताबें उपलब्ध करा दें और शासन प्रशासन रहने के लिए घर के साथ कपड़े और राशन की सुविधा उपलब्ध करा दे।


परीक्षा की तैयारी के लिए नहीं बची किताबें और नोट्स
वहीं, कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली छात्रा आरती अहिरवार(Aarti Ahirwar) ने बताया कि इस भीषण आग में उसकी पूरी किताबें और नोट्स जलकर राख हो गए। उसे भी पढ़ाई को लेकर बहुत चिंता हो गई है। आरती स्कूल में हमेशा टॉप करती थी। वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। आरती का कहना है कि अब वह तैयारी कैसे करेगी और और परीक्षा कैसे देगी। ऐसे में उसे कुछ समझ नहीं आ रहा। उसने अधिकारियों से मांग की हैं कि उनका घर फिर से पहले की तरह कर दे।

पीड़ितों को जर्जर स्कूल में ठहराया
निगम व जिला प्रशासन ने पीड़ितों को सेक्टर-9 गवर्नमेंट मिडिल स्कूल में ठहराया है, उसका भवन जर्जर है। सुबह बाजार के लोगों ने इडली खिला दिया। निगम की ओर से जहां ठहराया गया, वहां चटाई तक नहीं थी।

सिख समाज ने की मदद
गुरुद्वारा माता गुजरी जी हुडको, भिलाई (हुडको सिख समाज) ने पीड़ितों के लिए स्कूल में लंगर का इंतजाम कर दिया। दोपहर तक गद्दे की भी व्यवस्था की गई। सिख समाज की ओर से अध्यक्ष - हरबंस सिंह जब्बल, सचिव जसपाल सिंह, कोषाध्यक्ष इंदरजीत सिंह भट्टी, सह सचिव जसदेव सिंह जब्बल, रबलीन सिंह, गुरलीन सिंह, हरभजन सिंह, हरचरण सिंह ने इस काम में हिस्सा लिया।

गहने जलकर खाक
जीवन बचाने के जद्दोजहद में बच्चों के अरमान राख हो गए। मासूमों के मायूस चेहरों को देखकर जिला प्रशासन ने जिला शिक्षा अधिकारी को जल्द किताबें उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया है। पीड़ित कृष्णा ने बताया कि बच्चों के लिए उसने गहने खरीदकर रखा था। वह डिब्बा और गहने जलकर खाक हो गए। घर में अनाज, कपड़े, बिस्तर, बर्तन सब जल गया। मौके पर मिली रुक्मणी ने बताया एक डिब्बे में कुछ नकद रखी थी, वह पूरी तरह जल गए।

बस एक गलती की वजह से 5 बच्चों की बच गई जान
कृष्णा अहिरवार ने बताया कि उनकी 4 बेटियां और एक बेटा है। पति के साथ सेक्टर-9 अस्पताल में हर दिन केयर टेकर का काम करने जाती है। रात को घर से जाते वक्त बच्चों को कमरे में रखकर बाहर से ताला बंद कर देती थी। गुरुवार की रात को बच्चों ने भीतर से ताला लगा लिया और जल्दी में वह अस्पताल निकल गई। जब रात 2 बजे मोहल्ले में आग लगने की सूचना मिली, तो डर से भागते हुए पहुंची। तब देखा कि बच्चे मोहल्ले वालों के साथ बाहर मौजूद हैं। बच्चों ने बताया कि आज ताला भीतर से लगा था, इस वजह से भागने में कामयाब हुए। अगर बाहर से ताला होता तो नहीं निकल पाते।

25 घरों में 125 लोग
25 छोटी-छोटी झोपड़ियों में करीब 125 लोग रहते थे। आगजनी की घटना में जानी कुमार चौधरी नामक व्यक्ति घायल हुआ। चौधरी ने बताया मोहल्ले से बाहर निकलने के दौरान लोहे की टिन से पैर कट गया। काफी खून बह गया।

Published on:
18 Feb 2023 06:55 pm