
छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (Photo Patrika)
CSVTU Bhilai News: छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ने इंजीनियरिंग, फार्मेसी सहित तमाम तकनीकी पाठ्यक्रमों के पुराने विद्यार्थियों के लिए एन-4 (एन माइनस फोर) नियम को खत्म कर दिया है। यह निर्णय कार्यपरिषद की बैठक में लिया गया। एन-4 खत्म होने से अब विद्यार्थियों को ईयर बैक से छुटकारा मिलेगा। इससे हजारों विद्यार्थियों को डिटेन होने से राहत मिलेगी और उनका साल बर्बाद नहीं होगा। दरअसल, केंद्र सरकार एआईसीटीई को बंद करके सिंगल रेगुलेटर एजेंसी तैयार करने जा रही है।
संभावित तौर पर एक से दो वर्षों में इसकी शुरुआत हो सकती है। ऐसे में सीएसवीटीयू में एआईसीटीई के पुराने नियमों के तहत पढ़ाई कर रहे छात्रों की नियामक व्यवस्था प्रभावित होती। वहीं, एआईसीटीई और एनईपी के अलग-अलग नियमों से व्यवस्था बोझिल हो जाती। इसलिए सीएसवीटीयू ने पुराने विद्यार्थियों को एन-4 से राहत दे दी है। हालांकि, यह नियम नए एनईपी विद्यार्थियों पर लागू नहीं होगा।
सीएसवीटीयू में एन-4 नियम को लेकर काफी असमंजस रहा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने एन-4 की पैरवी करते हुए कहा था कि सीएसवीटीयू खराब इंजीनियर बनाने के बजाय कुछ ही काबिल इंजीनियर बनाए तो ज्यादा बेहतर होगा। इसके बाद कार्यपरिषद की बैठक में सीएसवीटीयू ने एन-4 लागू कर दिया था। वही नियम आज भी जारी था। डिटेन विद्यार्थियों की संख्या में लगातार इजाफा होने के कारण सीएसवीटीयू ने करीब एक दशक पुराने इस नियम को अब शिथिल कर दिया है।
एन-4 नियम के तहत पांचवें सेमेस्टर में जाने के लिए इंजीनियरिंग छात्र का प्रथम सेमेस्टर ऑल क्लीयर होना चाहिए। एक भी पेपर में बैक होने पर उसे डिटेन यानी एक साल पीछे कर दिया जाता है। ऐसा ही छठवें सेमेस्टर में भी होता है। मतलब, जब तक दूसरे सेमेस्टर के सभी पेपर पास नहीं होंगे, छठवें में प्रवेश नहीं मिलेगा। छात्र को अपने जूनियर के साथ दोबारा पढ़ाई करनी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नियम से छात्र आगे के दो साल खूब मेहनत करके पढ़ते थे, ताकि तीसरे साल में प्रवेश मिल सके। छात्रों का परीक्षा परिणाम भी बेहतर होता था। हालांकि, जिनके पूर्व सेमेस्टर क्लीयर नहीं होते थे, उन्हें अपने जूनियर छात्रों के साथ दोबारा एक साल की पढ़ाई दोहरानी पड़ती थी।
तकनीकी विवि में एन-4 नियम वर्ष 2005 से 2011 तक अपनाया गया। नियमों को लचीला करने के लिए 2011 में संशोधन किया गया, जिसके तहत प्रथम सेमेस्टर में कम से कम तीन पेपर में पास होना जरूरी था। शेष पेपर में बैक आने पर भी आगे बढऩे की अनुमति मिलती थी। पहले छात्रों को डिटेन नहीं किया जाता था। उन्हें किसी न किसी तरह आगे के सेमेस्टर में भेज दिया जाता था। इस तरह पांचवें सेमेस्टर तक पहुंचते-पहुंचते छात्रों के कई पेपर बैकलॉग में जमा हो जाते थे। सीएसवीटीयू ने इंजीनियरिंग की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए 2015 में एन-4 को दोबारा लागू कर दिया था।
सीएसवीटीयू कुलपति डॉ. अरुण अरोरा ने कहा
एआईसीटीई के सिलेबस से पढ़ाई कर रहे पुराने छात्रों के लिए एन-4 समाप्त कर दिया गया है। अब उन छात्रों के आगे बढऩे का रास्ता नहीं रोका जाएगा। ये छात्र डिटेन नहीं होंगे और न ही उनका ईयर बैक लगेगा। यह निर्णय कार्यपरिषद में लिया गया।
Updated on:
17 Oct 2026 03:03 pm
Published on:
17 Oct 2026 03:03 pm
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