लाल आतंक के साए में पहली बार नक्सलियों के फरमान को नजरअंदाज कर आदिवासी प्रदेश के सबसे संवेदनशील थाने में से एक किस्टाराम में तिरंगा फहराने पहुंचे।
भिलाई . लाल आतंक के साए में पहली बार नक्सलियों के फरमान को नजरअंदाज कर आदिवासी प्रदेश के
सुकमा जिले के सबसे संवेदनशील थाने में से एक किस्टाराम में तिरंगा फहराने पहुंचे। नक्सलियों ने 15 अगस्त के पूर्व पर्चे फेंककर आदिवासियों से स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाने की अपील की थी। बावजूद बरसते पानी में बड़ी संख्या में किस्टाराम थाने के आस-पास के गांवों में रहने वाले आदिवासी थाने पहुंचकर मुख्य समारोह का हिस्सा बने। थाना प्रभारी गौरव पांडेय के नेतृत्व में गांव के वरिष्ठ नागरिक ने ध्वजारोहण किया।
ग्रामीणों को किया था आमंत्रित
यह स्वतंत्रता दिवस किस्टाराम गांव के नागरिकों के लिए कुछ खास था। इस साल स्वतंत्रता दिवस पर किस्टाराम में तैनात जिला बल, डीआरजी, सीआरपीएफ एवं कोबरा के जवानों ने संयुक्त रूप से ध्वजारोहण करके तिरंगे को सलामी दी। सभी यूनिट के जवान शामिल हुए। विशेष रूप से किस्टाराम ग्राम के ग्रामीणों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था।
पहली बार खुले मैदान में किया ध्वजारोहण
किस्टाराम के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब सभी सुरक्षा बल के जवान एकजुट होकर स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण के लिए अपने कैम्प से बाहर आए। नक्सली हमले के खतरे के बीच जान जोखिम में डालकर ग्रामीणों के साथ खुले मैदान में ध्वजारोहण किया।
लाल सलाम के गढ़ में गूंजा वंदे मातरम्
लाल सलाम के गढ़ में पहली बार आदिवासियों ने जोश से लबरेज होकर भारत माता के जयकारे लगाए। वंदे मातरम् से पूरा इलाका गूंज उठा। इस अवसर पर डिप्टी कमांडेंट रविन्द्र कुमार, ग्राम सरपंच कडती सीताराम, सहायक कमांडेंट ऋषिपाल सिंग, सहायक कमांडेंट लक्ष्मीकांत, बीएस राठोर, थाना प्रभारी किस्टाराम गौरव पाण्डेय, डीआरजी दोरनापाल प्रभारी उप निरीक्षक आशीष सिंह राजपूत, प्लाटून कमांडर विकास प्रताप सिंह, निरीक्षक शरद ताम्रकार, किस्टाराम के ग्रमीण एवं समस्त जवान उपस्थित थे।