जवान और किसान मिलकर मोहला क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई कहानी गढऩे जा रहे हैं।
कोमल धनेसर@भिलाई. राजनांदगांव के नक्सली क्षेत्र मोहला के पानबरस कैंप ऑपरेटिंग बेस (सीओबी) में आईटीबीपी के जवान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में धरती की हरियाली को संजोने में लगे हैं। मोहला में तैनात आईटीबीपी की 44 बटालियन देश की पहली बटालियन है, जहां माओवाद प्रभावित गांवों के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा रहा। यहां जवान और किसान मिलकर मोहला क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई कहानी गढऩे जा रहे हैं।
स्ट्राबेरी और काजू के पौधे करते हैं तैयार
कठिन ड्यूटी के साथ खाली समय में स्ट्राबेरी और काजू के साथ ही मशरूम के पौधे तैयार कर रहे हैं जिससे किसान खेती की नई तकनीक सीख सकें। साथ ही वे उन किसानों को स्ट्राबेरी और काजू जैसी महंगी फसल तैयार करने में मदद भी कर रहे हैं। ताकि फसल का उन्हें अच्छा दाम भी मिल सके।
पौधे बांटने के बाद जवान करते हैं मॉनिटरिंग
जवान किसानों को पौधे बांटने के साथ-साथ कुछ दिनों की ट्रेनिंग दे रहे हैं, वे इस पौधों को खेत में लगाकर लाभ कमा सकें। इस वर्ष स्ट्राबेरी के 2 हजार 7 सौ और काजू के 3 हजार 150 पौधे बांटे गए। किसानों को पौधे दिए हैं उनकी जवान मॉनिटरिंग भी करते हैं ताकि उन्हें कोई दिक्कत ना आए।
ऐसे आया ख्याल
44 बटालियन के सेकंड इन कमान अधिकारी पारस भीम थापा ने बताया कि डीआईजी अशोक कुमार नेगी के सुझाव पर ऐसा प्लान तैयार किया जिससे वहां के किसानों को लंबे समय तक फायदा मिले। कमांडेंट जीएन चोई और अन्य अधिकारियों ने मिलकर यह प्लानिंग की। धीरे-धीरे नर्सरी में पौधों की संख्या बढ़ गई।
इन्होंने मिलकर तैयार की नर्सरी
डिप्टी कमांडेंट एके कौशिक और सीओबी के असिस्टेंट कमाडेंट सुनील कुमार ने मिलकर जवानों के साथ नर्सरी तैयार की। जिसे जब समय मिलता जवान वहां आकर मिट्टी और खाद के साथ बीजों का रोपण करता है। मोहला क्षेत्र के पानबरस, रामगढ़, पीरखार, भगवानटोला, पुजारीटोला, कंडे, फड़की, जबक्कसा एवं तोलम गांव के किसान इनकी खेती कर रहे हैं।