भिलाई

Youth Day: : साइकिल से नरवा के पानी को खेतों तक पहुंचाने की जुगाड़ तकनीक

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के युवा वैज्ञानिक डॉ. जितेन्द्र सिन्हा का इनोवेशन सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नरवा (बूंद-बूंद पानी का सिंचाई में उपयोग) और कैलोरी बर्न एक साथ करने का उपाय पर आधारित है। उन्होंने साइकिल से चलने वाली सिंचाई पंप मशीन बनाई है।

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Jan 12, 2020
Youth Day: : साइकिल से नरवा के पानी को खेतों तक पहुंचाने की जुगाड़ तकनीक
Youth Day: : साइकिल से नरवा के पानी को खेतों तक पहुंचाने की जुगाड़ तकनीक

ताराचंद सिन्हा @ भिलाई. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के युवा वैज्ञानिक और छात्रों ने साइकिल के जुगाड़ से लाजवाब वाटर लिफ्टिंग सिस्टम तैयार किया है। इसे न केवल नदी-नाले के पानी को बागवानी-फसलों की सिंचाई के लिए लिफ्ट किया जा सकता है, बल्कि बिना किसी बिजली की खपत के ग्राउंड फ्लोर से थर्ड फ्लोर तक पानी को साइकिल पर बैठे-बैठे लिफ्ट कर सकते हैं।

सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नरवा

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के युवा वैज्ञानिक डॉ. जितेन्द्र सिन्हा का इनोवेशन सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नरवा (बूंद-बूंद पानी का सिंचाई मेंउपयोग) और कैलोरी बर्न एक साथ करने का उपाय पर आधारित है। उन्होंने साइकिल से चलने वाली सिंचाई पंप मशीन बनाई है। जिम साइकिल पर प्रयोग किया है, लेकिन उन्होंने किसानों के लिए बहुत कम लागत का फ्रेम भी तैयार किया है। इसका छोटे किसान नरवा, डबरा या कुआं के पानी को लिफ्टि कर सिंचाई के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। डॉ सिन्हा कहते हैं कि यह साइकिल एक ऐसा साधन है। जो लोगों के स्वास्थ्य और सिंचाई दोनों के लिए मददगार है।

एक मिनट में 36 लीटर पानी लिफ्ट
उनका कहना है कि छत्त्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति कई तरह की है। पठारी क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बहुत ही कम है। जहां सुविधा है, वहां अप-डाउन एरिया होने की वजह नहर या नरवा का पानी आसानी से खेतों तक नहीं पहुंचता। ऐसी स्थिति में छोटे किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए परेशानी होती है। किसान या तो खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए डीजल से चलने वाले मोटर पंप का इस्तेमाल करते हैं या फिर बिजली से चलने वाले मशीन से पानी को लिफ्ट करते हैं। लेकिन सभी स्थानों पर पंप चलाने के लिए बिजली की व्यवस्था नहीं है। ऐसे स्थानों पर साइकिल कनेक्टेड पंप मशीन का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक आदमी एक मिनट साइकिल चलाएगा, तो इससे 36 लीटर पानी पंप कर सकता है। इसी तरह से 35-40 मिनट साइकिल चलाकर 100 वर्ग मीटर एरिया की सिंचाई कर सकते हैं। साइकिल चलाने से निकलने वाली मैकेनिकल एनर्जी से साइकिल के पहिए के साथ जुड़े मोटर पंप का व्हील घुमता है। इससे मोटर चालू हो जाती है, फुटबाल के माध्यम से पानी की लिफ्टिंग शुरू हो जाती है। इस तरीके से किसान नदी, नाले के पानी को लिफ्ट कर बागवानी फसलों की सिंचाई कर सकता है।

जुगाड़ तकनीक की देशभर में सराहना

पाटन विकासखंड के भखारा सेमरा (पचेड़ा)के रहने वाले डॉ. जितेन्द्र सिन्हा ने कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय जबलपुर से बी.टेक. और गोविंद वल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंत नगर से एम.टेक. की पढ़ाई की है। स्वॉइल वाटर इंजीनियरिंग में इंदिरा गांधी कृषि विवि से पीएचडी किया है। तीनों में गोल्ड मेडलिस्ट हंै। भारत सरकार की स्वाइल कंजर्वेशन सोसाइटी ने 2018 में इस कार्य के लिए फेलोशिप दिया। बेस्ट इनोवेशन के लिए पुरस्कृत भी किया है। वे इंदिरा गांधी कृषि विवि में सहायक प्रोफेसर हैं। उनके मार्गदर्शन में राजनांदगांव के रहने वाले पंकज सिन्हा और रायपुर निवासी खोमेन्द्र साहू ने जिम साइकिल आधारित वाटर लिफ्टिंग मशीन तैयार किया है।

Updated on:
11 Jan 2020 09:59 pm
Published on:
12 Jan 2020 06:01 am