
Mahadev Satta Case: महादेव सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर पर गिरफ्तारी की खबरें हर साल एक बार सुर्खियां बनती हैं, लेकिन हकीकत में पकड़ आज तक नहीं हो सकी है। न कोई भारतीय एजेंसी इसकी पुष्टि करती है और न ही उसके गुर्गे कुछ बता पाते हैं। हालांकि सीबीआई और ईडी की लगातार कार्रवाई के कारण दुबई में सौरभ की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
सूत्रों के अनुसार ऑनलाइन सट्टा का नेटवर्क अब दुबई से साउथ अफ्रीका में नया ठिकाना बना रहा है। गौरतलब है कि महादेव सट्टा ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने 2021-22 में भारत छोडक़र दुबई में सेटअप तैयार किया था। दो विला खरीदकर छत्तीसगढ़ के 100 युवकों से शुरुआत की थी। धीरे-धीरे टीम बढ़ी और सैकड़ों विला के साथ दुबई में एक तरह की कॉलोनी ही बना ली गई।
कैंप एरिया, मदर टेरेसा निवासी सट्टा पट्टी लिखने वाला सौरभ ऑनलाइन सट्टा ठगी के नेटवर्क से बड़ा साम्राज्य खड़ा करने में कामयाब रहा। करीब दो महीने पहले दुबई स्थित उसके बंगले पर पुलिस ने छापा मारा था। करीब 5 हजार करोड़ की संपत्ति अटैच की गई थी। इसमें महंगी घडिय़ां, विला, नकद, जेवर और डिजिटल करेंसी शामिल थीं। डेढ़ महीने पहले वह कार से ओमान जा रहा था, जहां अवैध पासपोर्ट के कारण पकड़ा गया। जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह छूट गया। भारतीय एजेंसियां उसे भारत लाने के लिए लगातार दबाव बना रही हैं।
दुबई से लौट रहे युवकों का कहना है कि प्रमोटर्स ने छत्तीसगढ़ के युवकों से काम लेना कम कर दिया है। उन्हें भारत वापस भेजा जा रहा है। ऑनलाइन सट्टा कारोबार का मैनेजमेंट संभालने के लिए पाकिस्तानी युवकों से टाइअप किया गया है। अब उन्हीं को काम दिया जा रहा है। इस कारण छत्तीसगढ़ के डोमिसाइल वाले युवकों से काम छिन रहा है। अब तक दुर्ग-भिलाई के करीब 100 से अधिक युवक वापस आ चुके हैं।
सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल की गिरफ्तारी और भारत लाने के लिए भारतीय एजेंसियां काम कर रही हैं। ईडी ने सौरभ के करीबी राज गुप्ता को सरेंडर कराकर उससे पूछताछ की। दुबई में स्थित संपत्तियों की फोटो और वीडियो के साथ डिटेल इक_ा कर भारतीय दूतावास को दी गई। इसके बाद दुबई सरकार ने सौरभ के ठिकानों पर कार्रवाई और पूछताछ तेज कर दी है।
ऑनलाइन सट्टा और साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों पर दुर्ग पुलिस की लगातार कार्रवाई का असर अब दुबई से संचालित सट्टा नेटवर्क पर भी दिखने लगा है। पुलिस की सख्त कार्रवाई से ऐसे गिरोहों की आर्थिक गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा है। जानकारी के अनुसार, दुबई से संचालित ऑनलाइन सट्टा और गेमिंग नेटवर्क मनी ट्रांजैक्शन के लिए देशभर में खुलवाए गए तथाकथित म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल कर रहे थे। इन खातों के जरिए ऑनलाइन गेमिंग ऐप और साइबर ठगी से प्राप्त रकम का लेनदेन किया जाता था।
समन्वय पोर्टल के माध्यम से छत्तीसगढ़ पुलिस को संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिल रही है। इसी आधार पर दुर्ग पुलिस ने जिले के 13 थाना क्षेत्रों में अब तक 39 प्रकरण दर्ज किए हैं। कार्रवाई के दौरान 1,149 म्यूल बैंक खातों को फ्रीज कराया गया है और 165 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, फिलहाल 1,013 संदिग्ध बैंक खातों की जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन खातों का उपयोग ऑनलाइन सट्टा, गेमिंग ऐप और साइबर ठगी से जुड़े पैसों के लेनदेन में किया जा रहा था।
छत्तीसगढ़ पुलिस सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को गिरफ्तार नहीं कर सकी। इस मामले में कई जनप्रतिनिधियों, पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सामने आए। अब मामला ठंडा पड़ गया। फिलहाल पुलिस म्यूल अकाउंट पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर नेटवर्क की कमर तोडऩे में जुटी है।
संदिग्ध खातों को लगातार फ्रीज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी से ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों पर असर पड़ा है। ऑनलाइन सट्टा गिरोहों के लिए धन के लेनदेन में मुश्किलें बढ़ी हैं, जिससे उनके नेटवर्क पर दबाव बना है। इस संबंध में आगे की जांच और कार्रवाई लगातार जारी है। - सुखनंदन राठौर, एएसपी शहर