
रसमड़ा की कंपनियों पर पुलिस की दबिश (फोटो सोर्स- पत्रिका)
BSP Scrap Theft: बीएसपी से 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के बहुचर्चित मामले में पुलिस अब पूरे सिंडिकेट की जड़ तक पहुंचने की तैयारी में है। शुरुआती कार्रवाई के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि बीएसपी के फ्लू डस्ट परिवहन का ठेका किसकी सिफारिश पर मिला और इस पूरी प्रक्रिया में किन प्रभावशाली लोगों की भूमिका रही। इसी सिलसिले में दुर्ग के रसमड़ा और रायपुर के सिलतरा स्थित कुछ औद्योगिक इकाइयों में दबिश दी गई, जहां चोरी का स्क्रैप खपाए जाने की आशंका है।
26 मई को भिलाई के अकलोरडीह स्थित एके ट्रेडर्स के गोदाम से 250 टन बीएसपी स्क्रैप बरामद होने के बाद शुरू हुई कार्रवाई में अब तक ट्रांसपोर्टरों समेत 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में बीएसपी के जीएम हिमांशु भूषण मलिक और इंजीनियरिंग एसोसिएट मनोज देवांगन भी शामिल हैं। पुलिस अब उन बीएसपी और सीआईएसएफ अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिनकी ड्यूटी के दौरान पिछले कई महीनों से स्क्रैप चोरी का सिलसिला चलता रहा।
पुलिस जांच का फोकस अब केवल चोरी तक सीमित नहीं है। यह भी जांच की जा रही है कि फ्लू डस्ट के ठेके के लिए किसने सिफारिश की थी और इस प्रक्रिया से किन लोगों को लाभ मिला। जांच एजेंसियां उन प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं, जिनके संरक्षण में कथित तौर पर ट्रांसपोर्टरों और अन्य लोगों का नेटवर्क सक्रिय था।
पुलिस टीम ने रसमड़ा और सिलतरा क्षेत्र की उन औद्योगिक इकाइयों में भी जांच की, जहां चोरी का स्क्रैप (BSP Scrap Theft) खपाए जाने की आशंका है। सूत्रों के अनुसार, कुछ स्थानों पर इकाइयां बंद मिलीं। वहीं स्क्रैप कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बीएसपी से चोरी का माल उपलब्ध नहीं पर ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र की करीब दस इकाइयों का संचालन बंद हो गया।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि कुछ आरोपी बीएसपी अधिकारियों के स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संपर्क में थे। पुलिस यह पता लगा रही है कि इन मुलाकातों का उद्देश्य क्या था और क्या इनका संबंध स्क्रैप परिवहन अथवा ठेका प्रक्रिया से था। सूत्रों के अनुसार, कुछ मामलों में एक जनप्रतिनिधि के निजी सहयोगी के माध्यम से संपर्क बनाए जाने की भी जानकारी मिली है, जिसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस को जांच के दौरान यह भी जानकारी मिली है कि कार्रवाई शुरू होने के बाद कुछ संदिग्ध ट्रकों को रायपुर के चंदनडीह स्थित यार्ड में कटवा दिया गया। ऐसे वाहनों की संख्या करीब 60 बताई जा रही है। अब यह जांच का विषय है कि इन ट्रकों को परिवहन विभाग की वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर कबाड़ किया गया या फिर संभावित जांच से बचने के उद्देश्य से ऐसा किया गया।
मामले की जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई है। पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए हर पहलू से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सुखनंदन राठौर, एएसपी, शहर दुर्ग
Updated on:
12 Jul 2026 12:59 pm
Published on:
12 Jul 2026 12:58 pm
