
Bhilai News: भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा नगर निगम में दिसंबर में प्रस्तावित चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। तीनों ही निगमों में वर्तमान में कांग्रेस की सत्ता है, ऐसे में कांग्रेस के लिए यह चुनाव साख बचाने की चुनौती होगा, वहीं भाजपा के लिए खोया जनाधार वापस पाने का अवसर। भिलाई नगर निगम प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा निगम है। यहां महापौर नीरज पाल के नेतृत्व में कांग्रेस का कब्जा है। रिसाली में शशि सिन्हा और भिलाई-चरोदा में निर्मल कोसरे महापौर हैं। तीनों जगह कांग्रेस ने पिछले चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त दी थी।
कांग्रेस विकास कार्यों को मुख्य हथियार बनाने की तैयारी में है। अमृत मिशन, सडक़-पानी, उद्यान विकास और प्रधानमंत्री आवास योजना में दुर्ग जिले के प्रदर्शन को कांग्रेस भुनाना चाहती है। संगठन स्तर पर वार्डवार बूथ कमेटियों को सक्रिय किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल की योजनाओं और वर्तमान सरकार की नाकामियों को लेकर कांग्रेस जनता के बीच जाने की रणनीति पर काम कर रही है। टिकट वितरण में स्थानीय समीकरण और जातिगत संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भिलाई निगम की जंग सबसे रोचक होगी। रिसाली नवगठित निगम होने से वहां सत्ता विरोधी लहर का असर दिख सकता है, जबकि भिलाई-चरोदा में स्थानीय मुद्दे निर्णायक होंगे। दिसंबर का चुनाव दोनों दलों के लिए 2028 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
भाजपा इस बार तीनों निगमों में वापसी के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। भ्रष्टाचार, जल संकट, खस्ताहाल सड़कों और टैक्स वृद्धि को मुद्दा बनाया जाएगा। भाजपा ने वार्ड स्तर पर सर्वे शुरू कर दिया है और संभावित प्रत्याशियों की सूची तैयार की जा रही है। संगठन का फोकस बूथ मजबूत करने और महिला व युवा मतदाताओं को साधने पर है। प्रदेश में भाजपा सरकार होने का लाभ उठाते हुए विकास के लिए डबल इंजन का नारा दिया जाएगा।