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देश के कई राज्यों में थनौद की दुर्गा प्रतिमाओं की धूम, लेकिन महंगाई से घटा मुनाफा, जानें कैसे?

Durga Idol Demand: नवरात्र के साथ ही थनौद में बनी मां दुर्गा की प्रतिमाओं की मांग छत्तीसगढ़ समेत देश के कई राज्यों में बढ़ गई है। गांव की करीब 40 वर्कशॉप में 1500 से अधिक प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं और सालाना कारोबार करीब 8 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।
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Thanaud Durga Idols

दुर्गा प्रतिमाओं की धूम (फोटो सोर्स- पत्रिका)

दुर्ग@ हेमंत कपूर। Chhattisgarh Durga Idols: नवरात्र के आते ही शिल्पग्राम थनौद की बनी मां दुर्गा की प्रतिमाओं की चमक छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के कई राज्यों में बिखरने लगी है। चार पीढ़ियों की विरासत को सहेजे इस गांव में निर्मित प्रतिमाओं की मांग मध्यप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मुंबई और तेलंगाना तक फैली हुई है। इस बार गांव की लगभग 40 वर्कशॉप में 5 से 25 फीट ऊंची 1500 से 1600 दुर्गा प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं, जिनकी कीमत 15 हजार से 3 लाख रुपए तक है।

इस हुनर से थनौद में हर साल करीब आठ करोड़ रुपए का कारोबार होता है। थनौद का मूर्ति शिल्प केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है। इन वर्कशॉप्स में आसपास के गांवों के 700 से 800 कारीगरों को रोजगार मिलता है, जिनमें परिवार की महिलाएं भी सजावट और निर्माण में हाथ बटाती हैं। नवरात्र के अलावा यहाँ सालभर गणेश, शिव और हनुमान जी की प्रतिमाएं भी बनाई जाती हैं।

मांग भरपूर, लेकिन महंगाई से घटा मुनाफा

अन्य राज्यों में भारी मांग के बावजूद मूर्तिकार लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी से परेशान हैं। कच्चे माल के दाम दो से तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। दो साल पहले 180 रुपए लीटर मिलने वाला पेंट अब 400 रुपए से ऊपर पहुंच गया है। लकड़ी, पुआल, बारदाना और सजावटी सामान की कीमतें कई गुना बढ़ने और कारीगरों को 1500 से 2000 रुपए प्रतिदिन मजदूरी देने के कारण मूर्तियों का निर्माण बेहद महंगा हो गया है। उस अनुपात में मूर्तियों के दाम न बढ़ने से महीनों की कड़ी मेहनत के बाद एक प्रतिमा पर मूर्तिकार को महज 8 से 10 हजार रुपए ही बच पाते हैं।

लव चक्रधारी, मूर्तिकार, थनौद के मुताबिक, मूर्ति निर्माण की हर सामग्री तीन से चार गुना तक महंगी हो चुकी है। कई बार कर्ज लेकर सामान खरीदना पड़ता है। बिक्री का बड़ा हिस्सा सामग्री और मजदूरी में चला जाता है, जिससे महीनों की मेहनत के बाद बमुश्किल 8 से 10 हजार रुपए ही बचते हैं।

रामा चक्रवर्ती, मूर्तिकार, थनौद के मुताबिक, थनौद में बनी मां दुर्गा की प्रतिमाओं की मांग छत्तीसगढ़ के अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी रहती है। इस वर्ष विभिन्न पंडालों के लिए करीब 1500 से अधिक प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।