जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाला आधा पेट भोजन भी दोपहर १२ बजे की जगह २ बजे परोसा जा रहा है।
दुर्ग . धमधा रोड स्थित 30 बिस्तर जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में सप्ताह भर से नाश्ते में और अब सुबह शाम दिए जाने वाले भोजन में कटौती कर दी गई है। मरीजों को दिए जाने वाला आधा पेट भोजन भी दोपहर १२ बजे की जगह २ बजे परोसा जा रहा है। असमय खाना खाने से बीमार मरीजों के सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है। इस अव्यवस्था का मुख्य कारण चार माह से बजट नहीं मिलना बताया जा रहा है।
भोजन में कटौती कर दी गई
भर्ती मरीजों की सुध लेने जब पत्रिका की टीम अस्पताल पहुंची तो लचर भोजन व्यवस्था सामने आया। खास बात यह है कि आयुर्वेदिक अस्पताल के परिसर में ही जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. एचएल सिंह का कार्यालय है। मरीजों ने इस आशय की शिकायत अधिकारियों से की थी। इसके बाद भी व्यवस्था में किसी तरह का सुधार नहीं हुआ। मरीजों ने बताया कि पांच दिन नियमित रुप से नाश्ते में दिए जाने वाले दूध व अंडा को पहले दिया गया। इसके बाद दो दिनों से भोजन में कटौती कर दी गई। मरीजों को भर पेट भोजन नहीं मिल रहा है। मरीजों ने बताया कि नजदीक के चाय दुकान से वे बिस्कुट व चाय खरीदकर खा पी रहे हैं।
23 मरीज है भर्ती
आयुर्वेदिक अस्पताल में वैसे तो ३० बिस्तर का है। पुरुष वार्ड में १५ और फिमेल वार्ड १५ बिस्तर का है। वर्तमान में दोनों वार्ड को मिलाकर कुल २३ मरीज भर्ती हैं। शासन की योजना के तहत भर्ती मरीजों को सुबह का नाश्ता के साथ ही दो समय का भोजन दिया जाता है।
ठेके पर है भोजन व्यवस्था
पहले जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में भर्ती मरीजों का भोजन अस्पताल के किचन में तैयार होता था। अब भोजन व्यवस्था ठेके पर दिया गया है। आयुर्वेदिक अस्पताल में भोजन परोसने की व्यवस्था संध्या जामगड़े को दी गई है। भोजन परोसने के एवज में ६९ रुपए प्रति मरीज के हिसाब से भुगतान किया जाता है।
चार माह से राशि जारी नहीं हुई
भोजन व्यवस्था के लिए अनुबंध मार्च २०१७ से मार्च २०१८ के लिए है। हर माह भर्ती मरीजों के दिए जाने वाले भोजन और नाश्ता की गणना कर भुगतान हर माह जिला आयुर्वेद अधिकारी कार्यालय से किया जाता है। संचालनालय से चार माह से इस मद पर राशि जारी ही नहीं की है।
व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी
स्व-साहयता समूह अध्यक्ष की संध्या जामगड़े ने बताया कि पिछले चार माह का पैसा अब तक नहीं मिला है। दो माह तक उधार में सामान लाकर मरीजों को भोजन और नाश्ता कराया। बार बार बिल भुगतान करने की मांग पर अधिकारी बजट नहीं आने की बात कहते हैं। हमारी आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। बिना बजट के चार माह तक भोजन देने के बाद व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ चुकी है। इसके बाद भी भोजन और नाश्ता परोसा दिया जा रहा है।
चल-फिर नहीं सकता
ग्राम गनियारी की शिवकुमारी देवी ने बताया कि नाती साहिल (१० वर्ष) पिछले 10 दिनों से भर्ती है। वह चल फिर नहीं सकता। बच्चे को हर दिन दूध व अंडा देना अनिवार्य है, लेकिन यहां पर नाश्ते में दूध व अंडा को बंद कर दिया गया है।
दूध नहीं दिया जा रहा
डोगरगढ़ के बसंत राव ने बताया कि पिछले पांच दिनों से भर्ती हूं। नाश्ते में केवल एक छोटी कटोरी उपमा, दलिया या पोहा दिया जाता है। यह पर्याप्त नहीं है। अगर दूध नहीं दिया जा रहा तो अन्य व्यवस्था करना चाहिए। अनिवार्य रुप से दिए जाने वाला पपीता भी नहीं दिया जा रहा।
भरपेट भोजन नहीं दिया जा रहा
ग्राम भेड़सर के सागर देशमुख ने बताया कि मैं लकवा का मरीज हूं। मुझे समय पर भोजन व नाश्ता करना आवश्यक है। नाश्ते के बाद ही सिकाई व मालिश कराने जाता हूं। पांच दिनों से समय पर नाश्ता व खाना नहीं मिल रहा है।भोजन भी भर पेट नहीं दिया जा रहा है।