CG Opium Case: खेतों का चयन सोच-समझकर किया गया था। यहां की रेतीली (सैंडी) मिट्टी और ठंडा वातावरण अफीम की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है।
CG Opium Case: दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में सामने आए अफीम की अवैध खेती के मामले में जांच के साथ-साथ चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। खेत में जिस तरीके से फसल तैयार की गई थी, उसे देखकर विशेषज्ञ इसे सुनियोजित और तकनीकी तरीके से की गई खेती मान रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक शिवनाथ नदी के किनारे स्थित खेतों का चयन सोच-समझकर किया गया था। यहां की रेतीली (सैंडी) मिट्टी और ठंडा वातावरण अफीम की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं गांव से दूर होने के कारण इस स्थान पर लोगों की आवाजाही भी कम रहती है, जिससे खेती को छिपाकर करना आसान हो जाता है।
करोड़ों की फसल का खुलासा
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार यहां करीब 7 करोड़ 88 लाख रुपए की अफीम की फसल तैयार की जा रही थी। इस पूरे मामले ने न केवल प्रशासन को चौंकाया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि अवैध खेती के लिए किस तरह योजनाबद्ध तरीके अपनाए जा रहे हैं।
अलग-अलग चरणों में लगाए गए पौधे
जांच के दौरान खेत में अफीम के पौधे विभिन्न अवस्थाओं में मिले। कुछ पौधे जर्मिनेशन स्टेज में तीन-चार इंच ऊंचाई के थे, जबकि कुछ वेजिटेटिव, पिलरिंग, फूटिंग और हार्वेस्टिंग स्टेज में पाए गए। विशेषज्ञों के अनुसार यह तरीका इसीलिए अपनाया गया था, ताकि अलग-अलग समय पर फसल तैयार हो और लगातार कई महीनों तक उत्पादन मिलता रहे।
नदी से सिंचाई की व्यवस्था
फसल की सिंचाई के लिए खेत में विशेष ट्रायंगुलर मशीन लगाई गई थी, जिसके जरिए शिवनाथ नदी से पानी खींचकर खेतों तक पहुंचाया जाता था। सामान्य तौर पर अफीम की फसल 120 से 128 दिनों में तैयार हो जाती है, लेकिन इस तरह चरणबद्ध खेती से करीब पांच महीने तक उत्पादन लेने की योजना बनाई गई थी।
अफीम की खेती के लिए विशेष जलवायु और मिट्टी की जरूरत होती है। नदी किनारे की जमीन में नमी और उपजाऊ मिट्टी होने से ऐसी फसल के लिए अनुकूल मानी जाती है।
संदीप भोई
डिप्टी डायरेक्टर