मीठे गन्ने का मंडप में जब हरी-हरी तुलसी दुल्हन और शालिग्राम दूल्हा बनेंगे तो शहर में भी शहनाईयां गूंज उठेगी। देवउठनी एकादशी के दिन श्रीहरि चीर निद्रा से जागेंगे और फिर चार महीने से रुके हुए मंगलिक कार्य फिर शुरू होंगे।
भिलाई. आज देवउठनी एकादशी (Devauthani Ekadashi in Chhattisgarh) है। इसके एक दिन पहले गुरुवार को भिलाई में 80 ट्रकों में 8 लाख से ज्यादा गन्ना पहुंचा। इन गन्नों से तुलसी विवाह (Tulsi vivah in Bhilai) के लिए घरों में तुलसी और शालिग्राम के लिए विवाह मंडप आज सजेगा। एकादशी के एक दिन पहले भिलाई में अंबिकापुर, रीवा और सतना से पहुंचे व्यापारियों ने एक दिन में ही 80 ट्रक गन्ना बेचा। वहीं शहर के चिल्हर बाजारों में भी दो दिन से गन्ने बिक रहे हैं। सेक्टर 2, पावर हाउस, नंदिनी रोड सहित कई स्थानों पर दो दिनों से गन्ने से भरे ट्रकों से चिल्हर व्यापारी खरीदी कर रहे हैं। इस बार थोक में 450 रुपए में गन्ने के 25 नग बिके। वहीं चिल्हर में एक नग गन्ना 30 से 40 रुपए तक बिका।
मीठे गन्ने का मंडप में जब हरी-हरी तुलसी दुल्हन और शालिग्राम दूल्हा बनेंगे तो शहर में भी शहनाईयां गूंज उठेगी। देवउठनी एकादशी के दिन श्रीहरि चीर निद्रा से जागेंगे और फिर चार महीने से रुके हुए मंगलिक कार्य फिर शुरू होंगे। देवउठनी एकादशी के दिन शहर में भी कई शादियां होंगी। तुलसी विवाह से ही शुरू हो रहे विवाह के मुहूर्त में इस महीने के आखिर में सबसे ज्यादा शादी के मुहूर्त है।
पंडित पवन चौबे ने बताया कि 8 नवंबर को तुलसी विवाह के दिन का मुहूर्त अभिजित होता है। इसलिए इस दिन विवाह शुभ माना जाता है। वहीं इसके बाद नवंबर में विवाह के लिए देवपंचाग के अनुसार 19, 20, 22, 23, और 28 नवंबर का दिन शुभ है। वहीं दिसंबर में दो दिन ही शादी के मुहूर्त है जो 11 एवं 12 दिसंबर को है।
व्रत से अश्वमेघ यज्ञ सा फल
देवउठनी एकादशी के दिन व्रत करने का भी बेहतर फल मिलता है। एकादशी महात्यम के अनुसार देवउठनकी एकादशी का व्रत करने से व्रतधारी को हजार अश्वमेघ यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञ के बराबर फल मिलता है। उन्होंने बताया कि एकादशी के दिन तुलसी विवाह के लिए सुबह 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 28 मिनट का समय सर्वोत्म है।
जागेंगे देव
देवउठनी एकादशाी पर आज घरों में तुलसी का विवाह शालिग्राम के साथ कराया जाएगा। इसके साथ ही देवशयनी एकादशी के दिन क्षीर सागर में चिर निंद्रा में गए भगवान विष्णु भी कल जागेंगे। इस अवसर पर कृष्ण मंदिरों में भी विशेष पूजन होगा। खासकर चौमासा का व्रत करने वाले लोग भी इस दिन अपना व्रत पूरा कर भगवान को उन सारी चीजों का भोग लगाएंगे। जिनका त्याग उन्होंने देवशयनी एकादशी के दिन किया था।
फल और सब्जियां प्रसाद में शामिल
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी मइया और शालिग्राम को मौसमी फल, भाजियां, सब्जियां आदि का भोग लगाया जाएगा। जिसमें शंकरकंद, आंवला, चना भाजी, लालभाजी, मूली, अमरूद, सीताफल, बेर, गन्ना, बैगन आदि चीजें शामिल होंगी। मान्यता है कि इस दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह कराने से दांपत्य जीवन सुखयम रहता है। इस दिन सुहागिनें माता तुलसी को चुनरी के संग सुहाग की सामग्री भी अर्पण करेंगी।