कैदी के बयान को सही ठहराते हुए न्यायालय ने रिश्वत लेने वाले राजस्व निरीक्षक मानलाल वर्मा और भृत्य तुलसी राम पटेल को दोषी ठहराया।
दुर्ग . सजा काट रहे कैदी के बयान को सही ठहराते हुए न्यायालय ने रिश्वत लेने वाले राजस्व निरीक्षक मानलाल वर्मा (५३ वर्ष) और भृत्य तुलसी राम पटेल (४३ वर्ष) को दोषी ठहराया। एसीबी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अजीत कुमार राजभानू ने दोनों आरोपी को रिश्वत की मांग करने पर एक वर्ष और रिश्वत लेने की धारा के तहत दो वर्ष करावास सुनाई। दोनों ही धारा के तहत आरोपियों को चार-चार हजार जुर्माना भी जमा करना होगा। बता दें कि इस मामले का प्रार्थी शंकर नगर निवासी मनोज पाण्डेय हत्या के अपराध में सेंट्रल जेल में सजा काट रहा है।
रिश्वत की रकम शर्ट की जेब से बरामद
प्रकरण के मुताबिक आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने 22 सिंतबर 2008 को आरआई मानलाल वर्मा व तुलसी राम को गिरफ्तार किया था। रिश्वत की रकम 2200 रुपए तुलसी राम के शर्ट की जेब से बरामद किया था। घटना के समय तुलसी भूअभिलेख कार्यालय के गैलरी में था। वहीं आरआई कक्ष में बैठा था। गिरफ्तार करने पर आरआई ने रिश्वत लेने से मना कर दिया था, लेकिन साक्ष्य के आधार पर एससीबी ने दोनों पर अपराध दर्ज कर जेल दाखिल कराया। इस मामले में एसीबी ने जांच पूरी कर २०१४ में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया था।
डायवर्सन के अनुशंसा के लिए मांगी थी रिश्वत
प्रार्थी मनोज पाण्डेय ने एसीबी को जानकारी दी थी कि उसका उरला में १७२० वर्गफीट जमीन है। जिस पर वह मकान बनाना चाहता है। वह जमीन का डायवर्सन कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। ३८०० रुपए शासकीय शुल्क जमा कर चुका है। इसके अलावा आरआई अनुशंसा करने अतिरिक्त शुल्क मांग रहा था। इसी शिकायत पर एसीबी ने रेड कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
भृत्य ने की थी मध्यस्थता
आरआई ने २५०० रुपए की मांग की थी। तब प्रार्थी ने राशि को ज्यादा कहा था। बाद में भृत्य ने उसे आश्वासन दिलाया कि वह साहब से बात कर लिया है २२ सौ रुपए ले आना। रुपए लाने पर आरआई ने राशि भृत्य को देने कहा था। भृत्य का कहना था कि इसमें से वह २००० रुपए साहब के थे वहीं २०० रुपए उसका था।
जेल से आया था गवाही देने
जानकारी के मुताबिक प्रार्थी हत्या के आरोप में सजा काट रहा है। वर्तमान में वह दुर्ग सेंट्रल जेल में निरुद्ध है। बयान देने वह जेल से न्यायालय पहुंचा था।
जमानत पर रिहा हुए आरोपी
फैसला सुनाए जाने के बाद न्यायालय में दोनों आरोपियों ने यह कहते हुए जमानत के लिए आवेदन प्रस्तुत किया कि वे इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे। न्यायालय ने दोनों ही आरोपी का जमानत आवेदन स्वीकार कर जमानत पर रिहा कर दिया।