छत्तीसगढ़ में 53 फीसदी नवजातों को नसीब नहीं होता जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला दूध। चौंकाने वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण रिपोर्ट, तेजी से गिर रही छत्तीसगढ़ में स्तनपान कराने की दर।
भिलाई. छत्तीसगढ़ की माताएं जन्म के एक घंटे के भीतर चार सौ पोषक तत्वों से युक्त अपना पहला दूध 53 फीसदी शिशुओं को नहीं पिला पाती। ये चौंकाने वाले आंकड़ें राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट में सामने आई हैं। हर साल १ से ७ अगस्त तक बंद कमरों और चंद अस्पतालों में विश्व स्तनपान दिवस मनाकर खानापूॢत करने वाले महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग के जागरूकता अभियान पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिसका सीधा असर नवजातों में बढ़ते कुपोषण और शिशु मृत्यु दर पर पड़ रहा है।
53 फीसदी बच्चों को विभिन्न वजहों से मां का पहला दूध नहीं मिल पाता
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के चौथे संस्करण की रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में जहां 47.8 फीसदी बच्चों के नसीब में पहला दूध आता है। वहीं शहरी इलाकों में महज 44.3 फीसदी शिशु ही मां का पहला अमृत दूध पी पाते हैं। कुल मिलाकर सरकारी, निजी अस्पतालों और घर में जन्म लेने वाले केवल ४७.१ त्न बच्चे ही जन्म के एक घंटे के भीतर सैकड़ों बीमारियों से बचाने वाला पहला दूध पी पाते हैं जबकि 53 फीसदी बच्चों को विभिन्न वजहों से मां का पहला दूध नहीं मिल पाता। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के हालिया रिपोर्ट में भी छत्तीसगढ़ को स्तनपान की गिरती दर वाले राज्यों की श्रेणी में रखा गया हैं जो काफी चिंतित करने वाला है।
इन बीमारियों का खतरा टल जाता है स्तनपान करने वाले शिशु में
१. नवजात को डायरिया जैसे रोग होने की संभावना कम हो जाती है।
२. मां के दूध में मौजूद तत्व बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
३. स्तनपान कराने से मां व बच्चे के मध्य भावनात्मक लगाव
बढ़ता है।
४. मां का दूध न मिलने पर बच्चे में कुपोषण की संभावना बढ़ती है।
५. मां को स्तन कैंसर की संभावना कम हो जाती है।
६. यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निभाता है।
मां को स्तनपान कराने से होते हैं ये फायदे
१. यह स्तन व डिम्ब ग्रंथि के कैंसर की संभावना को कम करता है।
२. यह प्रसव के बाद एनीमिया की संभावना को कम करता है।
३. मां को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना वापस पाने में सहायक है।
4. स्तनपान कराने वाली मां में मोटापा सामान्यत: कम पाया जाता।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
जन्म के तुरंत बाद या ज्यादा से ज्यादा घंटेभर के भीतर नवजात को स्तनपान कराया जाए तो शिशु मृत्युदर काफी कम हो सकती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार मां का पहला दूध (कोलेस्ट्रम) संपूर्ण आहार होता है। जिसे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 1 घंटे के भीतर ही शुरूकर देना चाहिए। सामान्यत: बच्चे को 6 महीने की अवस्था तक नियमित स्तनपान कराना चाहिए।
सिजेरियन प्रसव के बढ़ते प्रचलन से ज्यादा बिगड़ी स्थिति
स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय से समाज में जागरूकता अभियान चला रही डॉ. संध्या मदन मोहन ने बताया कि सिजेरियन प्रसव के बढ़ते चलन से भी पहला दूध शिशु को नसीब नहीं हो पाता। ज्यादातर अस्पतालों में नार्मल की जगह सिजेरियन प्रसव कराया जा रहा है।जिससे शिशु के जन्म के 12 घंटे तक मां अचेत अवस्था में रहती है। ऐसे में कीमती समय में मां का पहला दूध शिशु नहीं पी पाता।दूसरी तरफ पावउडर दूध और बेबी फूड के चलन से भी माताएं बच्चों को कुछमहीने बाद स्तनपान कराना छोड़ देती हैं जिससे बच्चों में कुपोषण का दर बढ़ रहा है।
स्तनपान को बढ़ावा देन जागरूकता अभियान
दुर्ग के शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभारी, डॉ. एसके जामगढ़े ने बताया कि माताओं में स्तनपान को बढ़ावा देन जागरूकता अभियान चला रहा है। आधुनिक जीवनशैली के चलते भी माताएं ज्यादा समय तक शिशुओं को स्तनपान कराने से बच रही हैं उन्हें जागरूक किया जा रहा है।