24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

ब्रेस्टफीडिंग वीक 2018 : प्रसव बाद डेढ़ माह खट्टी चीजों से करें परहेज

world breastfeeding week 2018 : जन्म के बाद तुरंत बच्चे को मां का दूध पिलाने से रोग प्रतिरोधकता मजबूत होती है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Shankar Sharma

•

Updated: 3 Aug 2018, 5:21 AM IST

ब्रेस्टफीडिंग वीक 2018

ब्रेस्टफीडिंग वीक 2018 : प्रसव बाद डेढ़ माह खट्टी चीजों से करें परहेज

डिलीवरी के तुरंत बाद नवजात को मां का पीला गाढ़ा दूध पिलाना चाहिए। इससे शिशु में रोग प्रतिरोधकता बढ़ती है। प्रसव बाद महिला को सामान्य अवस्था में आने में डेढ़ माह लगते हैं। तब तक खट्टे फल, नींबू, अचार, इमली की चटनी या खट्टी चीजें खाने से बच्चे को भी दिक्कत हो सकती है। कोल्ड ड्रिंक्स, चाय और कॉफी के प्रयोग से बचें।

स्तनपान से शिशु मृत्युदर में 20 फीसदी की कमी लाई जा सकती है। प्रसव बाद बच्चे को दूध पिलाने के लिए प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटॉसिन हार्मोन बनते हैं। पहले दूध को कोलोस्ट्रम कहते हैं। यह शिशु को पीलिया से रक्षा करता है। ब्रेस्टमिल्क बढ़ाने के लिए दूध, चावल की खीर लें। जीरे को हल्का भूनें। सुबह-शाम खाने के बाद इसे तांबें के बर्तन में पानी के साथ आधा चम्मच लेने से दूध की गुणवत्ता बढ़ती है। आयुर्वेद में शतावरी, विदारीकंद मिलाकर 5 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ लेने से दूध की मात्रा बढ़ती है।

Myth & Truth
सामान्य डिलीवरी और स्तनपान से मां का शरीर बेडौल हो जाएगा। यह गलत धारणा है। स्तनपान से मां का वजन नियंत्रित होता है। ब्रेस्ट कैंसर की आशंका घटती है। शिशु को छह माह तक केवल स्तनपान कराएं।

शिशु को दें नौ माह बाद फल-सब्जियां
बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए, स्वस्थ, पौष्टिक और सुपाच्य सारे गुण मां के दूध के अलावा किसी चीज में नहीं होते। शिशु को छह माह बाद उबली सब्जियां, फल और नौ माह बाद अन्न देना चाहिए।

डॉ. राखी आर्य, स्त्री-रोग विशेषज्ञ, जनाना अस्पताल, जयपुर

डॉ. हेतल दवे, स्त्री रोग विशेषज्ञ, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर

स्तनपान की दर

जन्म के बाद तुरंत बच्चे को मां का दूध पिलाने से रोग प्रतिरोधकता मजबूत होती है।

54.9% है देश में छह माह तक स्तनपान की दर
58.2% है राजस्थान में छह माह तक केवल स्तनपान की दर
आंकड़े नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (2015-16)

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

बड़ी खबरें

View All

रोग और उपचार

स्वास्थ्य

ट्रेंडिंग

लाइफस्टाइल