
World Breastfeeding Week नवजात बच्चे के लिए मां का दूध होता है अमृत
बरेली। नवजात बच्चे के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं है। मां का दूध बच्चे को न सिर्फ कई बीमारियों से लड़ने की ताकत देता है वहीं मां का दूध शिशु को शारीरिक व मानसिक विकास भी प्रदान करता है। इतना ही नहीं स्तनपान कराने से मां को भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है लेकिन जागरूकता की कमी के कारण तमाम मां बच्चे को शुरू में स्तनपान नहीं कराती हैं जबकि बच्चे के जन्म से एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का दूध पिला कर कई गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है। इसलिए महिलाओं को जागरूक करने के लिए हर साल एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार से स्तनपान सप्ताह का आरंभ कर दिया है और महिलाओं को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
बाल मृत्यु दर में आती है कमी
बच्चे का जन्म होने के 24 घंटे बाद तक मां के दूध में कोलोस्ट्रम निकलता है। इसमें बच्चे को निरोगी रखने के लिए बहुत अधिक मात्र में एंटीबॉडीज होते हैं। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है। इसलिए जन्म के 24 घंटे तक का दूध बच्चों के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं है। जन्म के एक घंटे के भीतर मां दूध बच्चे किए लिए कितना जरूरी है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को स्तनपान शुरू कराने से 20 फीसद शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है। छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने से दस्त और निमोनिया के खतरे में क्रमश: 11 फीसद और 15 फीसद कमी लायी जा सकती है। इसके अलावा स्तनपान स्तन कैंसर से होने वाली मौत को भी कम करता है।
स्तनपान के लिए जरूरी बात
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स डॉ. अतुल अग्रवाल के अनुसार बच्चे के जन्म के बाद जितनी जल्दी हो बच्चे को स्तनपान जरूर कराना चाहिए। डॉक्टर अतुल के अनुसार जन्म के छह माह तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही देना चाहिए इससे बच्चे को कई तरह की बीमारियों से बचाया जा सकता है। छह माह पूरा होने के बाद बच्चे को मां के दूध के साथ अन्य पौष्टिक आहार देने चाहिए। उन्होंने बताया कि स्तनपान से न सिर्फ बच्चे को कई बीमारियों से बचाया जा सकता है बल्कि स्तनपान कराने से मां को स्तन कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है।
स्तनपान से मां को लाभ
गर्भाशय का संकुचन हो जाता है जिससे आंचल आसानी से छूट जाती है।
प्रसव के बाद अत्याधिक रक्तश्राव का खतरा कम हो जाता है।
स्तन कैंसर, गर्भाशय कैंसर और अंडाशय के कैंसर का खतरा कम हो जाता है।
हड्डियों के कमजोर पड़ने के प्रकरण कम हो जाते हैं।
परिवार नियोजन में कुछ हद तक सहयोग प्राप्त होता है।
प्रसव के बाद वजन घटाने में सहायक होता है।
शिशु के आहार व्यय पर संभावित लागत कम हो जाती है।
Published on:
02 Aug 2018 03:52 pm
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