World Startup Day: विदेशी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग में एक्सपर्ट बनने के बाद उन्हें विदेश में अच्छे पैकेज पर नौकरी के ऑफर भी मिले, लेकिन विनित ने अपने वतन लौटकर खुद के साथ-साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने का अहम निर्णय लिया।
World Startup Day: हर कोई परदेश की चकाचौंध देखकर वहीं बसने की सोच रखता है, मगर कम ही ऐसे हैं, जो विदेश की लैविश लाइफ स्टाइल को छोड़कर वतन लौटने का फैसला करते हैं। इन्हीं में से एक है भिलाई के विनित शर्मा। संपन्न परिवार में पैदा हुए इसलिए परिवार ने कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई के बाद देश की राजधानी दिल्ली से भेजा। यहां अच्छी शिक्षा हासिल कर विनित मार्केटिंग की बारीकियां सीखने के लिए लंदन रवाना हो गए।
विदेशी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग में एक्सपर्ट बनने के बाद उन्हें विदेश में अच्छे पैकेज पर नौकरी के ऑफर भी मिले, लेकिन विनित ने अपने वतन लौटकर खुद के साथ-साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने का अहम निर्णय लिया। छत्तीसगढ़ लौटे विनित ने बिजनेस में अपने हाथ आजमाने की शुरुआत कर दी। भिलाई में उद्योग स्थापित करने का इरादा किया। छोटी से कंपनी से अपने स्टार्टअप की शुरुआत की, जो आज एक नामी इंडस्ट्री का रूप ले चुकी है।
युवा उद्यमी ने इस प्लांट को शुरू करने के बाद रात-दिन मेहनत किया। जिससे उद्योग ने सही समय में ग्रोथ किया। अब इस उद्योग में उन्होंने करीब 500 लोगों को रोजगार दिया हुआ है। उन्होंने बताया कि नई तकनीक के साथ उद्योग को अपडेट करते जा रहे हैं। इसके साथ-साथ समय पर जॉब तैयार करके देना, उनकी पहली प्राथमिकता है।
विनित बताते हैं कि, औद्योगिक क्षेत्र में स्टील संरचना निर्माण का काम शुरू किया। इसके अलावा उपकरण विनिर्माण और स्वचालन, स्टील और मिश्र धातु कास्टिंग का काम पकड़ा। शुरुआत में ऑडर्स के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती थी, मगर एक शानदार टीम ने यह मुश्किल भी आसान कर दी। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की अलग-अलग यूनिट से जॉब तैयार करने के लिए टेंडर मिलने लगे। देखते ही देखते स्टार्टअप का यह सफर बड़ी कंपनी तक पहुंच गया। इसके बाद कभी मुड़कर नहीं देखा।
World Startup Day: विनित बताते हैं कि उद्योग शुरू करने के बाद दो साल कोरोनाकाल रहा। इस दौरान न तो हाथ में कोई बड़े काम आ रहे थे और न प्लांट में पूरे कर्मचारी थे। ऐसे में जिला प्रशासन की मदद से धीरे-धीरे काम लिए। इससे संयंत्र धीरे ही सही मगर चलता रहा। इससे कोरोना काल के दौरान भी कर्मियों के परिवार का लालन पालन होता रहा। दूसरी ओर उद्योग भी बंद करने की नौबत नहीं आई।