राष्ट्रीयकृत बैंकों में विगत 10 वर्षों से लंबित 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग तथा 12वें द्विपक्षीय समझौते में यूनियनों के साथ इस मांग पर सहमति होने के बावजूद भारत सरकार द्वारा अब तक इसे लागू नहीं किए जाने के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को एक दिवसीय हड़ताल […]
राष्ट्रीयकृत बैंकों में विगत 10 वर्षों से लंबित 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग तथा 12वें द्विपक्षीय समझौते में यूनियनों के साथ इस मांग पर सहमति होने के बावजूद भारत सरकार द्वारा अब तक इसे लागू नहीं किए जाने के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर मंगलवार को एक दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया गया। भीलवाड़ा जिले की 130 से अधिक राष्ट्रीयकृत बैंक शाखाओं में पूर्ण रूप से कार्य ठप रहा, जिससे आम नागरिकों को बैंकिंग सेवाओं से वंचित रहना पड़ा। हड़ताल के कारण जिले भर में नकद लेन-देन, अंतरण एवं समाशोधन के माध्यम से लगभग 1500 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ। मुख्य प्रदर्शन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बसंत विहार शाखा के बाहर किया गया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार के स्वयं के कार्यालयों, भारतीय जीवन बीमा निगम, बीमा क्षेत्र, भारतीय रिज़र्व बैंक, नाबार्ड सहित अनेक संस्थानों में पहले से ही 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, इसके बावजूद राष्ट्रीयकृत बैंकों में इसे लागू न करना वित्त मंत्रालय एवं आईबीए की हठधर्मिता को दर्शाता है, जिसके लिए सरकार पूर्णतः जिम्मेदार है। प्रदर्शन में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से अभिषेक सुथार, सुनील पारिक, ललित जीनगर, दिलीप पारख, महिला प्रतिनिधियों में ममता मीणा, बैंक ऑफ बड़ौदा से अशोक बिड़ला, एस.पी. तिवारी, पंजाब नेशनल बैंक से शिव सोडाणी, रोनक बाल्दी, अन्य बैंकों से शिरीष व्यास, सुभाष रांका, शंकर, गोपाल, रामजी लाल सहित सैकड़ों बैंक कर्मचारी उपस्थित रहे। यूएफबीयू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार शीघ्र ही 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है, तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।