नगर निगम, नगर परिषद व नगर पालिकाओं में लगाए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
भीलवाड़ा.
राजस्थान राज्य सहकारी स्पिङ्क्षग एवं जिनिंग मिल्स एसोसिएशन लिमिटेड (स्पिनफैड) गंगापुर के १३५ श्रमिकों को सहाड़ा विधानसभा के होने वाले उपचुनाव से पहले राज्य सरकार ने इन्हें नौकरी देकर तोहफा दिया है। सरकार ने इन श्रमिकों को २३ नगर निगम, नगर परिषद तथा नगर पालिकाओं में लगाने का निर्णय लिया है। वित्त विभाग ने इसकी मंजूरी भी दे दी है। सहकारिता विभाग के मुख्य सचिव की ओर से तैयार किए गए प्रस्ताव के आधार पर १३५ कर्मचारियों को नौकरी पर लगाया गया है। गंगापुर स्पिनफैड लम्बे समय से बंद पड़ी है। राज्य सरकार ने श्रमिकों एवं उनके परिवारों के भरण पोषण एवं हित में निर्णय लेते हुए यह स्वीकृति जारी की है।
स्वायत शासन विभाग के अतिरिक्त निदेशक संजीव कुमार पाण्डेय ने गुरुवार को आदेश जारी कर इन सभी १३५ जनों को विभिन्न नगर निकाय में लगाया है। इन सभी को आदेश जारी होने के १५ दिवस में अपनी उपस्थिति सम्बन्धित विभाग में देनी होगी। इसके बाद यह आदेश स्वत: ही निरस्त हो जाएगा। पद ग्रहण करने से पूर्व दो उत्तरदायी व्यक्तियों से प्रमाणित स्वयं का चरित्र प्रमाण पत्र, सक्षम स्तर से जारी चिकित्सा प्रमाण पत्र, पुलिस सत्यापन प्रस्तुत करना होगा। इसके अलावा श्रमिक की जन्म तिथि शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य दस्तावेजों की जांच मूल प्रमाण पत्रों से किया जाएगा। पद ग्रहण करने के समय अन्य किसी जगह नियोजित नहीं होना चाहिए। श्रमिक का दो वर्ष तक परिवीक्षाकाल पर रहेंगे। इस दौरान स्पिनफैड में मिल रहे वेतन, भत्तों को सुक्षित रखते हुए निर्धारित फिक्स वेतन देय होगा।
यहां लगया श्रमिकों को
नगर निगम अजमेर ६, उदयपुर १०, भरतपुर ९, बीकानेर १०, नगर परिषद चित्तौडग़ढ़ १, नागौर ६, ब्यावर १५, किशनगढ़ ५, धोलपुर १, सवाईमाधोपुर ६, गंगापुर सिटी ८, श्री गंगानगर १०, हिण्डौनसिटी ५, अलवर १५, नगर पालिका गुलाबपुरा ४, निम्बाहेड़ा १, डीग १, बयाना २, खैरथल ५, तिजारा २, लालसोट ५ तथा सरदार शहर में ८ श्रमिकों को चतुर्थ श्रेणी के पद पर लगाया है।
जुलाई २०१७ में लगा दिया था ताला
भीलवाड़ा जिले के गंगापुर स्पिनफेड पर जुलाई २०१७ में ताला लटका दिया थआ। उस समय तक सरकार 346 श्रमिकों को ले ऑफ दे रही थी। मंत्रिमंडलीय उप समिति के स्पिनफेड यूनिट को बंद करने के निर्णय में योग्य श्रमिकों को अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भेजने की बात कही गई थी। उसके चलते ही यह नियुक्ति दी गई है। वर्ष 1981 में सात सितंबर को शुरू हुई गंगापुर को-ऑपरेटिव सूती धागा मिल ने हजारों श्रमिकों को न सिर्फ रोजगार दिया बल्कि गंगापुर बाजार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी रही है। यह कभी एशिया में गुणवत्ता की दृष्टि से नंबर वन यूनिट रही थी। अब ये यूनिट सिर्फ इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह गई है।