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जर्जर स्कूलों पर सिर्फ ‘सर्वे’ का खेल: पिछले साल 116 खतरनाक स्कूल मिले, 56 अब भी खड़े; अब फिर कागजी खानापूर्ति के आदेश

भीलवाड़ा जिले में जर्जर स्कूल भवनों को लेकर शिक्षा विभाग केवल कागजी खानापूर्ति में जुटा है। हर साल जर्जर स्कूलों का सर्वे तो करवाया जा रहा है, लेकिन मरम्मत का काम नहीं हो रहा है

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A mere 'survey' of dilapidated schools: Last year, 116 dangerous schools were found, 56 still standing; now, orders are being given for paperwork.

जर्जर स्कूलों पर सिर्फ 'सर्वे' का खेल: पिछले साल 116 खतरनाक स्कूल मिले, 56 अब भी खड़े; अब फिर कागजी खानापूर्ति के आदेश

भीलवाड़ा जिले में जर्जर स्कूल भवनों को लेकर शिक्षा विभाग केवल कागजी खानापूर्ति में जुटा है। हर साल जर्जर स्कूलों का सर्वे तो करवाया जा रहा है, लेकिन मरम्मत का काम नहीं हो रहा है। इसके कारण छात्रों व शिक्षकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। पिछले साल के सर्वे में चिन्हित किए गए जर्जर भवनों को अब तक जमींदोज नहीं किया जा सका है, और अब मानसून से ठीक पहले शिक्षा विभाग ने एक बार फिर नए सिरे से सर्वे के आदेश जारी कर दिए हैं।

पिछले साल के सर्वे का सच: 179 से 116 रह गए, ढहाए सिर्फ 60

भीलवाड़ा जिले में पिछले साल जुलाई में किए गए सर्वे के पहले चरण में 179 स्कूल जर्जर हालत में मिले थी। इन सभी को मौके पर ही सील कर दिया गया था। बाद में जिला कलक्टर के निर्देश पर जब पुन: सर्वे किया गया तो इनकी संख्या 179 से घटकर 116 रह गई। हैरानी की बात यह है कि इसमें से भी अब तक केवल 60 स्कूल भवनों को ही जमींदोज किया जा सका है। हालांकि, गनीमत यह है कि इन सभी जर्जर स्कूल भवन में पढ़ने वाले छात्र अन्य भवन में अध्ययन कर रहे हैं।

अब फिर कागजी खानापूर्ति, महज 1 दिन में सर्वे

पुरानी पेंडेंसी खत्म करने के बजाय, अब कागजी खानापूर्ति करने के लिए फिर से माध्यमिक शिक्षा निदेशक व जिला शिक्षा अधिकारी ने पुन: सर्वे करने के आदेश जारी किए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय प्रारम्भिक शिक्षा की ओर से सोमवार को सभी सीबीईओ के लिए एक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश में मानसून पूर्व जर्जर विद्यालयों के सर्वे के लिए 'ब्लॉक स्तरीय टीम गठित करने के निर्देश दिए। विडंबना देखिए कि 4 मई को जारी इस आदेश में सभी सर्वे और आवश्यक सुरक्षा कार्यवाही पूर्ण कर 5 मई तक ई-मेल पर रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भिजवाने की समय-सीमा तय की गई है। महज एक दिन में पूरे ब्लॉक का सर्वे होना स्पष्ट रूप से विभागीय कागजी खानापूर्ति की ओर ही इशारा करता है।

आदेश की मुख्य गाइडलाइन

  • टीम में सीबीईओ के साथ एक कार्मिक तथा ब्लॉक के जेईएन या एईएन शामिल होंगे।
  • जर्जर पाए गए कक्षों व ढांचों को अलग कर रस्सी या खतरे के निशान से घेराबंदी करवाएं।
  • जर्जर भवनों के उपयोग न होने की समस्त जिम्मेदारी संस्था प्रधान व पीईईओ की होगी।
  • चिन्हित जर्जर संरचनाओं को राजकीय अवकाश के दौरान जमींदोज करने की कार्रवाई करें।
  • निर्माणाधीन विद्यालयों में संवेदक की ओर से सुरक्षा गार्ड की तैनाती की जाए।
  • विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षण दें।
  • मानसून पूर्व विद्यालय की छतों की सफाई व बंद नालों व पाइपों की मरम्मत करवाएं।