भीलवाड़ा. डिस्क्ट्रिट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में स्वीकृत कार्यो में आक्षेप लगाकर रोड़े अटकाने व समय पर भुगतान नहीं करने पर दो कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया।
भीलवाड़ा. डिस्क्ट्रिट मिनरल फाउण्डेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में स्वीकृत कार्यो में आक्षेप लगाकर रोड़े अटकाने व समय पर भुगतान नहीं करने पर दो कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। अब इन फाइलों के निस्तारण के लिए जिला कोषाधिकारी रेखा शर्मा के सानिध्य में चार दिन का विशेष शिविर लगाने के निर्देश जिला कलक्टर आशीष मोदी ने दिए। इस सम्बन्ध में सोमवार को मोदी ने अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताई।
डीएमएफटी में प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व 300 करोड़ प्रति वर्ष भीलवाड़ा को मिल रहा। वर्ष-2017 से शुरू डीएमएफटी में कुल 2339 कार्य स्वीकृत किए गए। इनमें 1814 ही पूर्ण हो पाए। 855.56 करोड़ की लागत से होने वाले कामों में से 543 कामों पर विभागीय अधिकारियों ने कई तरह के आक्षेप लगाए। इसके चलते कई काम पूर्ण नहीं हो सके। पूरे काम होने पर समय पर भुगतान नहीं किया गया है। मामले को अधिकारियों ने कलक्टर के समक्ष उठाया तो कलक्टर ने खनिज विभाग व डीएमएफटी अधिकारियों को तलब किया। कलक्टर ने दो जनों को मौके पर ही बर्खास्त कर दिया गया। शाहपुरा के अधिकारी को बैठक से निकाल दिया। कलक्टर ने बाद में सभी विभाग के बकाया फाइलों के निस्तारण के लिए शिविर लगाने के आदेश दिए।
वर्ष 2017 के कार्यो का नहीं हुआ भुगतान
एक अधिकारी ने बताया कि डीएमएफटी में कई काम ऐसे हैं, जिनके भुगतान 2017 से बकाया हैं। कुछ ऐसे मामले हैं जो जांच में है, लेकिन संवेदक की गारंटी समय समाप्त हो गया। पांच सालों में जिले की कई सड़कें टूट चुकी या बारिश के कारण लगभग नदारद हो गई। एक संवेदक का कहना है कि जब वह भुगतान के लिए विभाग के पास गया तो किसी विभाग से एनओसी लाने को कहा। एनओसी लेने गया तो विभाग ने लाखों रुपए की पेनल्टी निकाल दी।
संवेदक व अधिकारियों को बुलाया
जिला कोषाधिकारी रेखा शर्मा का कहना है कि जो भी प्रकरण हैं, उनका निस्तारण कर रहे हैं। इसे लेकर अधिकारियों व संवेदक को तलब किया है। मंगलवार को आसीन्द व शाहपुरा के सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तलब किया जबकि बुधवार को मांडलगढ़ व गुलाबपुरा का शिविर होगा। गुरुवार व शुक्रवार को जलदाय विभाग के अधिकारियों को बुलाया है।