- 4.10 लाख स्वीकृत पदों में से 2.92 लाख ही भरे, सबसे बुरा हाल वरिष्ठ अध्यापकों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बड़े-बड़े दावों के बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। शिक्षा विभाग की ओर से 1 जनवरी 2026 को जारी ताजा आंकड़ों (शाला दर्पण पोर्टल) के अनुसार, विभाग में स्वीकृत पदों के मुकाबले भारी कमी बनी है। पूरे प्रदेश में विभिन्न संवर्गों के कुल 1 लाख 19 हजार 148 पद खाली पड़े हैं। यह स्थिति न केवल शिक्षण व्यवस्था को प्रभावित कर रही, बल्कि प्रशासनिक कार्यों पर भी भारी पड़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभाग में कुल 4 लाख 10485 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में केवल 2 लाख 92263 कर्मचारी कार्यरत हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति वरिष्ठ अध्यापकों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की है, जहां रिक्तियों का आंकड़ा हजारों में है।
शिक्षा विभाग में जहां एक तरफ हजारों पद खाली हैं, वहीं अध्यापक लेवल-1 में स्वीकृत पदों 53 हजार 718 के मुकाबले 54 हजार 642 शिक्षक कार्यरत हैं, यानी 924 शिक्षक अधिशेष हैं। प्रदेश के माध्यमिक स्कूलों में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले 'वरिष्ठ अध्यापकों' के 42 हजार से ज्यादा पद खाली होना शिक्षा की गुणवत्ता पर बड़ा सवालिया निशान है। कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने की बातों के बीच 'बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक' के 3,683 और 'वरिष्ठ कंप्यूटर अनुदेशक' के 944 पद खाली हैं। स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लगभग 81 प्रतिशत पद रिक्त हैं (29 हजार 631 में से 24 हजार 136 खाली), जिससे स्कूलों की सफाई और अन्य व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश के लाखों बेरोजगार अभ्यर्थियों की उम्मीदें एक बार फिर जाग गई हैं। रिक्त पदों की इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए अब सरकार पर नई बड़ी भर्तियों की विज्ञप्ति जारी करने का भारी दबाव है।