24 तीर्थंकरों की पालकियों संग उमड़ा श्रद्धा का समंदर, भक्ति और शक्ति के संगम से वस्त्र नगरी' हुई धर्ममयी
राजस्थान के भीलवाड़ा में सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से आयोजित महावीर जन्मोत्सव ने न केवल भक्ति की नई मिसाल पेश की, बल्कि शहर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय भी लिख दिया। सोमवार को जब 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं एक साथ नगर भ्रमण पर निकलीं, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरा देवलोक भीलवाड़ा की धरा पर उतर आया हो। धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा और समाज के हर संगठन के समर्पण ने इस उत्सव को एक ऐतिहासिक महाकुंभ का रूप दे दिया।
सुबह ठीक 9 बजे अग्रवाल उत्सव भवन से जुलूस का शंखनाद हुआ। इस बार का मुख्य आकर्षण भगवान ऋषभदेव प्रथम तीर्थंकर से लेकर भगवान महावीर 24वें तीर्थंकर तक की 24 प्रतिमाएं थीं। प्रत्येक पालकी को चार श्रद्धालुओं ने एक समान वेशभूषा में अपने कंधों पर उठा रखा था, जो अनुशासन और समानता का संदेश दे रहा था। आमलियों की बाड़ी मंदिर से भगवान का मुख्य रथ निकला, जो स्वाध्याय भवन पहुंचा। यहाँ अग्रवाल उत्सव भवन से आने वाली 24 पालकियां और झांकियां इसमें शामिल हुईं, जिससे दृश्य और भी भव्य हो गया।
जुलूस की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें परंपरा के साथ आधुनिकता का अनूठा तालमेल था। चार प्राचीन विंटेज कारों ने सबका ध्यान खींचा। इनमें समाज के वरिष्ठ जनों को सम्मानपूर्वक बैठाया गया था। 16 बुलेट मोटरसाइकिल और स्कूटर रैली के साथ युवा जैन ध्वज थामे चल रहे थे। पंजाब बैंड की स्वर लहरियों और नासिक ढोल की थाप पर श्रद्धालु पूरे जोश के साथ नृत्य कर रहे थे। चर्तुमुखी पार्श्वनाथ कल्पवृक्ष की झांकी आर्कषक लग रही थी।
महिला संगठनों ने इस जुलूस को अपनी रचनात्मकता से जीवंत बना दिया। मुख्य मार्गों पर लाइव रंगोली बनाई गई और विभिन्न मंडलों ने संदेशपरक प्रस्तुतियां दीं। वीतराग महिला मंडल ने 50 फीट लंबे जैन ध्वज के साथ नेतृत्व किया। आदिनाथ महिला मंडल की 24 सदस्यों ने पोम-पोम प्रॉप्स से समां बांधा। त्रिशला महिला मंडल ने भगवान महावीर के जन्म से जुड़े प्रतीकों छात्र, गाय और शेर की सजीव झांकी सजाई। पद्मावती व ज्ञानमती मंडल तिलक नगर और आमलियों की बाड़ी के मंडलों ने सरल ध्वज और ओम के प्रतीकों के माध्यम से धर्म की महत्ता बताई।
सकल दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि जुलूस से पूर्व अग्रवाल उत्सव भवन में 24 तीर्थंकरों को पाडुंशिलाओं पर विराजमान करके उन पर अभिषेक किया। बाद में विश्व की शांति के लिए सुरेश राजेश बड़जात्या व अनिल पाटनी (अजमेर) ने शांतिधारा की। उपाध्यक्ष प्रकाश गंगवाल ने बताया कि इस दौरान मुनि अरह सागर ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर प्रहार करते हुए कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में महावीर का जियो और जीने दो का संदेश ही एकमात्र समाधान है। शांतिधारा केवल जल की धारा नहीं, बल्कि विश्व में सुख-शांति की प्रार्थना है।
मंत्री नरेश गोधा ने बताया कि जुलूस सेवा सदन रोड, राजीव गांधी मार्केट, महावीर पार्क, एलएनटी रोड, रेलवे स्टेशन और गोल प्याऊ चौराहे से गुजरा। पूरे मार्ग में स्थानीय निवासियों और व्यापारिक व महिला संगठनों ने फूलों की बारिश कर पालकियों का वंदन किया। त्रिशलानंदन वीर की, जय बोलो महावीर की के नारों से पूरा शहर गुंजायमान रहा। जुलुस में तिलोक चंद छाबड़ा, जंबू भैसा, लोकेश अजमेरा, भैरूलाल बड़जात्या और आदिनाथ नवयुवक मंडल के सदस्यों ने व्यवस्थाएं संभालीं। इससे पहले शहर की सभी कॉलोनियों में प्रभातफैरी निकाली तथा मंदिरों में विशेष पूजा की गई।