ईसी मिलने के बाद भी अटकी फाइलें, वैध खनन शुरू करने में नाकाम हो रही आरएसएमएमएल, खान विभाग का सख्त रुख, लापरवाही पर 25.11 लाख की पेनल्टी
राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड की लेटलतीफी और ढुलमुल रवैये के चलते भीलवाड़ा जिले में बजरी का वैध खनन खटाई में पड़ गया है। हालात यह हैं कि कोटड़ी तहसील के तीन बड़े बजरी प्लॉटों बीजे 04, 05 और 06 की लीज के लिए पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) मिलने के बावजूद आरएसएमएमएल आगे की कागजी खानापूर्ति पूरी नहीं कर पा रहा है। सरकारी एजेंसी की इस सुस्ती का सीधा फायदा बजरी माफिया उठा रहे हैं। वैध रूप से बजरी का दोहन न होने के कारण इन तीनों लीज क्षेत्रों से दिन-रात अवैध बजरी का खनन धड़ल्ले से जारी है। इससे राज्य सरकार को लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। लापरवाही पर खान विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। खनि अभियंता ने आरएसएमएमएल को अलग-अलग नोटिस जारी कर तीनों लीज प्लॉटों पर नियमों की अनदेखी के चलते कुल 25 लाख 11 हजार 405 रुपए की भारी-भरकम पेनल्टी लगाई है।
खनि अभियंता के अनुसार आरएसएमएमएल को मंशा पत्र (एलओआई) जारी होने की तिथि से नौ माह के भीतर परफॉरमेंस सिक्योरिटी प्रस्तुत करनी थी, जो उन्होंने नौ माह की देरी से दी। इसी प्रकार शर्त संख्या 1 की पालना में 18 माह के भीतर पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) प्राप्त कर खान कार्यालय में प्रस्तुत करनी थी। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार संस्था ने प्राप्त ईसी भी खनिज विभाग को पेश नहीं की है। इसी विलंब के चलते स्थिर भाटक का 10 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से विभाग ने अप्रधान खनिज रियायत नियम 2017 के तहत यह जुर्माना लगाया है।
- प्लॉट बीजे-04 सोपुरा, अड़सीपुरा, आकोला प्लॉट पर परफॉरमेंस सिक्योरिटी में नौ माह और पर्यावरण स्वीकृति प्रस्तुत करने में चार माह के विलंब पर 7 लाख 98460 रुपए की पेनल्टी लगाई है। प्लॉट-05 आकोला में 7 लाख 4 हजार 145 रुपए तथा प्लॉट -06 आकोला में सिक्योरिटी और ईसी में विलंब के कारण 10 लाख 8 हजार 800 रुपए की पेनल्टी लगाई गई है। यह तीनों सरकार ने आमजन को सस्ती बजरी मिले इस मंशा को लेकर इस सरकारी उपक्रम दी थी।
आरएसएमएमएल को पहले दो लीज और हाल ही में एक और लीज की ईसी मिल चुकी है। इसके बावजूद फाइलों को आगे बढ़ाकर खनन पट्टा निर्गत करवाने और वैध दोहन शुरू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। मंशा पत्र की अवधि बढ़ाने के लिए अब विभाग ने पेनल्टी जमा कराने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर माफिया बेखौफ होकर नदी का सीना चीर रहे हैं। उधर आरएसएमएमएल के अधिकारियों का कहना है कि यह एक सरकारी उपक्रम है। ऐसे में खनिज विभाग की ओर से जो पेनल्टी लगाई गई है वह गलत है। इसे लेकर खनिज विभाग को एक पत्र भी लिखा गया है।