भीलवाड़ा

Acharya Mahashraman अतिशय तीर्थक्षेत्र बिजौलियां पहुंचे आचार्य महाश्रमण

प्रवृत्ति के तीन साधन, शरीर, वाणी और मन

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Nov 28, 2021
Acharya Mahashraman अतिशय तीर्थक्षेत्र बिजौलियां पहुंचे आचार्य महाश्रमण

भीलवाड़ा।
राजस्थान की धरती पर अपनी अहिंसा यात्रा के साथ गतिमान आचार्य महाश्रमण रविवार को बिजौलियांवासी श्रद्धालुओं की प्रार्थना को स्वीकार कर बिजौलियां स्थित दिगम्बर जैन पाश्र्वनाथ अतिशय तीर्थक्षेत्र जाने के लिए रविवार प्रात: सलावटिया के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से विहार किया। बिजौलियां से कई किलोमीटर पहले ही लोगों का समूह आचार्य के सानिध्य में पहुंच आचार्य के चरणों का अनुगामी बन मानों अहिंसा यात्रा में अपनी सहभागिता दर्ज करा रहा था। आचार्य जैसे-जैसे बिजौलियां के निकट आ रहे थे, श्रद्धालुओं का हुजूम बढ़ता जा रहा था। बिजौलियां के ठाकुर सहित सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालु आचार्य के स्वागत में उपस्थित थे। आचार्य लोगों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए लगभग दस किलोमीटर का विहार परिसम्पन्न कर बिजौलियां स्थित दिगम्बर जैन पाश्र्वनाथ अतिशय तीर्थक्षेत्र परिसर में पहुंचे। इस तीर्थक्षेत्र से जुड़े पदाधिकारियों ने आचार्य का परिसर के मुख्य द्वार पर अभिनन्दन किया।
दिगम्बर जैन पाश्र्वनाथ अतिशय तीर्थक्षेत्र कमेटी के कार्यालय भवन में आयोजित प्रवचन में श्रद्धालुओं को आचार्य ने कहा कि मनुष्य के पास प्रवृत्ति के तीन साधन हैं। शरीर, वाणी और मन। शरीर के माध्यम से आदमी कोई भी कार्य करता है। वाणी से बोलता है। वाणी विचारों के आदान-प्रदान का एक सक्षम माध्यम है। मन से आदमी स्मृति, कल्पना व चिन्तन करता है। शरीर तो फिर भी दिखाई देता है। इसके अंदर के अवयवों को देखने के लिए डॉक्टर कई सारे यंत्रों की सहायता लेता है। इसके अलावा दो और शरीर तैजस और कार्मण शरीर भी मौजूद है। कार्मण शरीर अध्यात्म का विषय है। आदमी जो कुछ भी बोलता है वह सुनाई देता है और कई बार लिखकर भी अपनी बात व्यक्त कर सकता है, किन्तु मन की बात कई बार अज्ञात रह जाती है। मन के भावों का थोड़ा अनुमान तो लगाया जा सकता है, किन्तु पूर्णरूप से मन की बात तो कोई मन: पर्यव ज्ञान रखने वाला साधक ही जान सकता है। दुनिया में ज्यादा पाप मन वाला प्राणी ही कर सकता है और ज्यादा धर्म साधना आदि भी मन वाला ही प्राणी कर सकता है। इसलिए आदमी को यह प्रयास करना चाहिए कि मन से किसी के अहित का चिन्तन न हो। आदमी को अपने मन को सुमन बनाने का प्रयास करना चाहिए। मन सुमन हो तो सद्गति और बुरा मन हो तो अधोगति की प्राप्ति हो सकती है। इसलिए आदमी को अपने मन को सुमन बनाने का प्रयास करना चाहिए कि ताकि उसकी आत्मा सुगति को प्राप्त कर सके।
आचार्य के प्रवचन के बाद तीर्थक्षेत्र के कमेटी से जुड़े सदस्य नरेन्द्र बगड़ा, पूर्व विधायक विवेक धाकड़, बिजौलियां ठाकुर सौभाग्य सिंह व यशवन्त पुंगलिया ने विचार व्यक्त किए। नन्दनी जैन ने आचार्य के स्वागत में गीत पेश किया।

Published on:
28 Nov 2021 04:21 pm
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