भीलवाड़ा

आकृति कला संस्थान देगा दिव्यांग बच्चों को कला प्रोत्साहन

तीन दिवसीय चित्रकला प्रशिक्षण शिविर
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Sep 27, 2017
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आकृति कला संस्थान देगा दिव्यांग बच्चों को कला प्रोत्साहन

भीलवाड़ा।

भले ही वह बोल व सुन पाने में सक्षम नहीं है लेकिन उसके हाथों में वह कमाल है उसका बनाया हर चित्र बोलता है। नजारा था भीलवाड़ा में पढ़े मूक-बधिर नीरज भाणावत की तीन दिवसीय चित्रकला प्रशिक्षण शिविर का। कैलाश पालिया ने बताया कि कुवाड़ा रोड़ स्थित मुकबधिर विद्यालय में उदयपुर से आए मुकबधिर कलाकार, नीरज बच्चों को तीन दिन से कला की बारीकियां सीखा रहे है। उसकी बनाई गई कलाकृतियां ही अब उसकी भावनाएं व्यक्त करने का एक जरिया भी बन चुका है। कलाकार नीरज भाणावत जन्म से ही मूक-बधिर है। अपनी पेन्टिग के शौक को ही उन्होंने अपने जीवन का मकसद बना लिया है। दिनोदिन अपनी कला में निखार लाने में प्रयासरत है। नीरज मूलत: कानोड़ के है।

नीरज की प्रारंभिक शिक्षा भीलवाड़ा के मूक-बधिर स्कूल में हुई और 9वीं -10वीं की पढ़ाई अजमेर में ही की लेकिन नीरज का मन पढ़ाई में नहीं लगता था परिणामस्वरूप 10वीं में अनुतीर्ण हो गया तब से कला को सब कुछ मानकर कला साधना में लग गया। उदयपुर में गुलाब बाग स्थित आर्ट गैलेरी में उसे पेन्टिग सीखने के लिए बीजी शर्मा आर्ट गैलेरी में दाखिला ले लिया। यही से नीरज की कला में निखार आता गया। धीरे-धीरे मिनिएचर कला में महारत हासिल कर ली, वर्तमान में नीरज सहेलियों की बाड़ी स्थित मेवाड़ आर्ट गैलेरी में नौकरी कर रहे है।पत्नी भी देती है साथनीरज की पत्नी भी मूक-बधिर है। उसे भी कला में काफी रूचि है।

जब नीरज तस्वीर बनाता है तो वह उसके चित्रों में रंग भरने का काम करती है। इससे नीरज का सहयोग भी हो जाता है और कला में पत्नी का साथ भी, नीरज के एक बेटी है जो पूरी तरह सामान्य है। नीरज को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व महाराणा मेवाड़ अरविन्द सिंह के हाथों सम्मानित हो चुका है।

Published on:
27 Sept 2017 01:38 pm