
ग्राफिक्स फोटो पत्रिका
Bhilwara Crime : भीलवाड़ा के आसींद थाना पुलिस ने कांवलास सरहद पर नेशनल हाइवे 158 के किनारे मिले शव की गुत्थी को सुलझाते हुए चौकाने वाला खुलासा किया है। जिसे शुरू में सड़क दुर्घटना माना जा रहा था, वह दरअसल संपत्ति और रुपयों के विवाद में किया गया हत्याकांड निकला। पुलिस ने मृतक के सगे बड़े भाई लक्ष्मीलाल खटीक उर्फ सोनू को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार गत 3 मई की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि डामर प्लांट के पास एक युवक का शव और मोटरसाइकिल पड़ी है। मृतक की शिनाख्त किशन उर्फ मेवाराम खटीक के रूप में हुई। मृतक के भाई लक्ष्मीलाल ने ही अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ दुर्घटना का मामला दर्ज कराया था।
जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह के निर्देशन और थानाधिकारी श्रद्धा पचौरी के नेतृत्व में जब टीम ने जांच शुरू की, तो कई संदिग्ध तथ्य सामने आए। इनमें मुख्यतः मृतक के शरीर पर घसीटने या रगड़ के निशान नहीं थे, जबकि एक्सीडेंट में ऐसे निशान अनिवार्य है। मोटरसाइकिल का स्विच बंद था और उस पर भी दुर्घटना के कोई गंभीर लक्षण नहीं थे। वहीं घटनास्थल पर एक संदिग्ध रस्सी और मृतक की चप्पल मिली। पुलिस ने उक्त तथ्यों के आधार पर जांच को गति दी।
कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब पुलिस ने परिवादी लक्ष्मीलाल से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी ने बताया कि उसने और उसके छोटे भाई मेवाराम ने प्लॉट पर 10 लाख रुपए का लोन लिया था, जिसमें से 5 लाख लक्ष्मीलाल ने लिए थे। मेवाराम लगातार अपने पैसे वापस मांग रहा था, जिसे लक्ष्मीलाल देना नहीं चाहता था।
2 मई की रात आरोपी ने मेवाराम को शराब के लिए पैसे दिए और उसे चमनपुरा स्थित खेत पर बने मकान में सोने के लिए बुला लिया। रात करीब 2 बजे जब मेवाराम गहरी नींद में था, तब लक्ष्मीलाल ने कुल्हाड़ी के पिछले हिस्से (मूंद) से उसके सिर पर ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया।
साक्ष्य मिटाने के लिए आरोपी ने शव को कट्टे में भरा और अपनी बाइक पर लादकर हाइवे के किनारे फेंक दिया ताकि यह महज एक सड़क हादसा लगे। इस त्वरित खुलासे में एएसआई सूर्यभान सिंह और टीम की विशेष भूमिका रही।
Published on:
11 May 2026 02:55 pm
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