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भीलवाड़ा: न्याय का झांसा देकर अस्मत लूटी, वकील ने किया विश्वास तार-तार, मिली 8 साल की सजा

न्याय की चौखट पर मदद की उम्मीद लेकर आई एक बेबस महिला को क्या पता था कि काला कोट पहनकर उसे इंसाफ दिलाने का वादा करने वाला ही उसकी जिंदगी में अंधेरा भर देगा। विश्वास की आड़ में पहले नशीली मिठाई खिलाकर अस्मत लूटी, फिर अश्लील वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल कर धन और सम्मान दोनों को रौंदा।

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Bhilwara Lawyer Jailed for 8 Years in Rape Case

वकील को 8 साल की सजा (पत्रिका सांकेतिक तस्वीर)

भीलवाड़ा: न्याय के मंदिर में जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो समाज का विश्वास डगमगाने लगता है। भीलवाड़ा के बहुचर्चित महिला उत्पीड़न मामले में कोर्ट ने एक ऐसा ही ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्याय दिलाने का वादा कर महिला की अस्मत लूटने और उसे ब्लैकमेल करने वाले वकील सिद्धांत सिंह उर्फ राहुल चारण को अदालत ने 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

मामला साल 2018 का है। पीड़िता अपने एक कानूनी प्रकरण के सिलसिले में कोर्ट आती-जाती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात चंद्रशेखर आजाद नगर निवासी अधिवक्ता सिद्धांत सिंह चारण से हुई। वकील ने पीड़िता को कानूनी मदद का भरोसा देकर उसका विश्वास जीता और उसका मोबाइल नंबर ले लिया।

घटनाक्रम के अनुसार, 11 अप्रैल 2018 को पीड़िता ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई कि आरोपी वकील एक दिन प्रसाद के नाम पर नशीली मिठाई लेकर उसके घर पहुंचा। उसने कहा कि तुम्हें न्याय मिले, इसके लिए मंदिर में प्रसाद चढ़ाया है। मिठाई खाते ही पीड़िता बेहोश हो गई। आरोपी ने इस स्थिति का फायदा उठाकर उसके साथ बलात्कार किया और मोबाइल से अश्लील फोटो व वीडियो बना लिए।

ब्लैकमेलिंग और आर्थिक शोषण का खेल

आरोपी यहीं नहीं रुका। उसने अश्लील वीडियो के जरिए पीड़िता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और लगातार उसका शारीरिक शोषण किया। शादी का झांसा देकर आरोपी ने महिला से सोने के जेवरात और एक लाख रुपये की नकदी भी ऐंठ ली। हद तो तब हो गई जब आरोपी के परिजनों ने पीड़िता के साथ मारपीट की और एक भूखंड अपने नाम करवाने का दबाव बनाया।

केस ऑफिसर स्कीम का असर

मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव ने इसे 'केस ऑफिसर स्कीम' के तहत लिया। एएसआई रामप्रसाद को केस ऑफिसर नियुक्त किया गया, जिन्होंने साक्ष्यों को मजबूती से जुटाया। विशिष्ट लोक अभियोजक कृष्णकांत शर्मा ने न्यायालय में पीड़िता का पक्ष रखते हुए आरोपी के खिलाफ पुख्ता गवाह और दस्तावेजी सबूत पेश किए।

8 साल बाद मिला इंसाफ

विशिष्ट न्यायालय (महिला उत्पीड़न एवं बलात्कार प्रकरण) के न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी सिद्धांत सिंह को दोषी माना। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिवक्ता जैसे गरिमामय पेशे की आड़ में ऐसा कृत्य अक्षम्य है। कोर्ट ने दोषी को 7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

इस फैसले ने न केवल पीड़िता के 8 साल पुराने जख्मों पर न्याय का मरहम लगाया है, बल्कि यह उन अपराधियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है, जो रक्षक की वर्दी या कोट पहनकर कानून की धज्जियां उड़ाते हैं। जिला पुलिस की प्रभावी पैरवी के कारण ही आज यह 'भक्षक' सलाखों के पीछे है।

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