भीलवाड़ा

आंकड़ों में कलाकारी: कागजों में हरियालो राजस्थान खूब हरा-भरा, जमीनी हकीकत में अफसरों ने किया गोलमाल

- वन विभाग की 16 नर्सरियों में 19 लाख पौधे, शिक्षा विभाग ने खरीद डाले 23 लाख

2 min read
Aug 13, 2025
Artistry in figures: Rajasthan is green on paper, but in reality officers messed up

जिला प्रशासन के पौधारोपण अभियान ने सरकारी विभागों के कामकाज पर सवालिया निशान लगाया है। "हरियालो राजस्थान" के तहत जिले में बड़े पैमाने पर पौधे लगाने के दावे हो रहे। हकीकत यह है कि आंकड़ों में कलाकारी की जा रही है। कागजी आंकड़ों में अभियान खूब हरा-भरा हो रहा जबकि जमीनी धरातल पर सब गोलमाल है। राजस्थान पत्रिका ने अभियान को लेकर पड़ताल की तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए। इनमें हस्यप्रद शिक्षा विभाग रहा है।

वन विभाग की जिले में 16 नर्सरियों में इस साल मात्र 19 लाख 33 हजार पौधे तैयार हुए। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने उनसे 23 लाख 48 हजार पौधे खरीद लिए। सवाल यह है कि जब उपलब्ध पौधे इतने थे खरीद के आंकड़े कैसे बढ़े? यह स्थिति तब है जब वन विभाग से पौधे केवल शिक्षा विभाग ही नहीं बल्कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल, अन्य सरकारी विभाग और आमजन भी खरीद रहे हैं। शिक्षा विभाग ने 8 अगस्त को कलक्टर को दी रिपोर्ट में 25 लाख 15 हजार पौधे लगाना बताया। इनमें 17 लाख 39 हजार पौधों का जियो टैग किया।

गमला और बीजारोपण भी गिने पौधारोपण में

अभियान में चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि कोई विद्यालय गमले में पौधा रख रहा या बीज बो रहा है, तो उसे भी पौधारोपण मानकर आंकड़ों में जोड़ा जा रहा। सरकारी व निजी विद्यालयों में 39.53 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इस येनकेन गिनती में शामिल किया जा रहा है।

अभियान राजस्व व शोपीस के लिए

आमजन का मानना है कि पौधारोपण अभियान धरातल पर हरियाली लाने से ज्यादा, राजस्व बढ़ाने और दिखावटी चल रहा है। पौधे लगाने के बाद उनकी देखरेख, पानी और सुरक्षा की व्यवस्था न होने से बड़ी संख्या में पौधे कुछ समय में सूख जाते हैं। मजेदार बात यह है कि शिक्षा विभाग की हकीकत भी दो माह बाद पता चलेगी जब जिन पौधों को जियो टैग किया उनको पुन: दो माह बाद जियो टैग करना है।

शिक्षा विभाग की बैठक में खुली पोल

सोमवार को हुई शिक्षा विभाग की बैठक में जब "हरियालो राजस्थान" के आंकड़े प्रस्तुत हुए, तो कई अधिकारी भी चौंक गए। बैठक में यह सवाल उठा कि इतने पौधे कहां से आए और क्या सभी वास्तव में लगाए गए। दरअसल, यह पहला मौका नहीं है जब पौधारोपण के आंकड़ों पर सवाल उठे हों। पिछले वर्षों में भी पौधे लगाने के दावे तो बड़े-बड़े हुए, लेकिन उनकी देखरेख में लापरवाही से अधिकांश पौधे सूख गए।

Published on:
13 Aug 2025 08:57 am
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