शहर की यातायात व्यवस्था के लिए रेलवे फाटक नासूर बनता जा रहा है। विडंबना यह है कि ट्रेन गुजरने के बाद जब फाटक खुलता है, तब लोगों की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ जाती हैं। फाटक खुलने के बाद लगने वाला जाम आमजन के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है, जिससे घंटों तक […]
शहर की यातायात व्यवस्था के लिए रेलवे फाटक नासूर बनता जा रहा है। विडंबना यह है कि ट्रेन गुजरने के बाद जब फाटक खुलता है, तब लोगों की मुश्किलें कम होने के बजाय और बढ़ जाती हैं। फाटक खुलने के बाद लगने वाला जाम आमजन के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है, जिससे घंटों तक यातायात अस्त-व्यस्त रहता है। जैसे ही फाटक खुलता है, दोनों ओर खड़े वाहन चालक पहले निकलने की होड़ में आमने-सामने आ जाते हैं।
ऑटो, दुपहिया वाहन और कारें एक-दूसरे में उलझ जाती हैं। व्यवस्थित कतार नहीं होने और यातायात पुलिस की अनुपस्थिति के कारण चंद मिनटों का रास्ता आधे घंटे में बदल जाता है। विशेष रूप से पीक आवर्स के दौरान स्कूली बच्चे और दफ्तर जाने वाले लोग इस कुप्रबंध का शिकार हो रहे हैं। शहरवासियों का कहना है कि रेलवे फाटक पर लगने वाला यह जाम नया नहीं है, लेकिन प्रशासन के पास इसका कोई ठोस समाधान नहीं है। कई जगहों पर ओवरब्रिज की मांग लंबे समय से लंबित है। एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी इस जाम में फंसकर रह जाती हैं, जो किसी गंभीर खतरे का संकेत है। प्रशासन को फाटक खुलने के समय वहां ट्रैफिक जवान की तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए।