शास्त्रीनगर आदर्श विद्या मंदिर में भामाशाहों का महाकुंभ
जब तक हम अपनी भाषा, अपनी भूषा और अपनी संस्कृति पर गर्व नहीं करेंगे, तब तक विकसित भारत का संकल्प अधूरा है। राष्ट्रहित की चेतना और स्वदेशी का भाव ही वह नींव का पत्थर है, जिस पर भविष्य के समर्थ भारत की इमारत खड़ी होगी। यह विचार विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री शिवप्रसाद शर्मा ने व्यक्त किए। वे शास्त्रीनगर स्थित आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित भामाशाह सम्मान एवं विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। समारोह में शहर के 250 से अधिक भामाशाहों ने शिरकत कर सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
शिवप्रसाद शर्मा ने 'स्व' की भावना पर बल देते हुए कहा कि व्यक्ति को अपनी जड़ों से जुड़ना होगा। उन्होंने आह्वान किया कि समाज का संपन्न वर्ग उन असहाय और वंचित लोगों के बारे में सोचे जो गिरी-कंदराओं (दुर्गम क्षेत्रों) में निवास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा राष्ट्र निर्माण तभी संभव है जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं पहुँचें। हमें उनके उत्थान के लिए संवेदनशील होकर चिंतन और धरातल पर कार्य करना होगा।
कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें भीलवाड़ा शहर के 250 से अधिक दानदाताओं और भामाशाहों की उपस्थिति रही। विद्यालय परिवार की ओर से अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान भामाशाहों ने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग का आश्वासन दिया, बल्कि सामाजिक सेवा के कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाने का सामूहिक संकल्प भी व्यक्त किया। विद्यालय प्रबंधन ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रहित में किए जाने वाले सामूहिक प्रयास ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।