
एसीबी जयपुर ने प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों से मांगा मिड-डे मील वितरण का कच्चा-चिट्ठा
राजस्थान में कोरोना महामारी के दौरान कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को बांटे गए मिड-डे मील के कॉम्बो पैकेट अब भ्रष्टाचार के घेरे में आ गए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अनुसंधान इकाई जयपुर ने इस मामले में कॉन्फेड के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ब्यूरो को अंदेशा है कि जब प्रदेश आपदा से जूझ रहा था, तब राशन वितरण के नाम पर 2 हजार करोड़ से अधिक का घोटाला किया गया। इसके तहत भीलवाड़ा जिले में करीब 60 करोड़ से अधिक के पैकेट वितरण किए गए थे।
एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप सारस्वत ने समस्त जिला शिक्षा अधिकारियों (मुख्यालय, प्रारंभिक शिक्षा) को नोटिस जारी कर निर्देश दिए हैं। विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे अपने जिले के उन सभी स्कूलों के प्रभारियों से सूचना एकत्र करें, जहां कोरोना काल में खाद्य सामग्री के कॉम्बो पैकेट बांटे गए थे। अधिकारियों को 30 मार्च तक जयपुर स्थित एसीबी मुख्यालय के कमरा नंबर 203 में रेकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से या संबंधित कार्मिक के जरिए उपस्थित होने को कहा है।
जांच को पुख्ता करने के लिए एसीबी ने दो अलग-अलग प्रारूप तैयार किए हैं। प्रोफोर्मा अ में अधिकारी स्तर में स्कूल का प्रकार, पीईईओ-सीबीईओ का विवरण, ठेकेदार का नाम और बिल-वाउचर का पूरा विवरण मांगा गया है। स्कूल स्तर पर प्रोफोर्मा ब में वितरण की तारीख, लाभान्वित छात्रों की संख्या, अभिभावकों के नाम व मोबाइल नंबर और वितरण के बाद बचे हुए पैकेटों की संख्या का मिलान किया जाएगा।
क्या वाकई पैकेट बंटे, क्या रेकॉर्ड में दर्ज अभिभावकों और छात्रों के नाम वास्तविक हैं या कागजों में ही वितरण दिखा दिया गया। ठेकेदारों को किए गए भुगतान और वास्तविक सप्लाई के बिलों में कितना अंतर है या इसके भुगतान में कोई खेल तो नहीं हुआ है। वितरण के बाद जो पैकेट शेष रहे, उनका क्या हुआ। इसका हिसाब किसके पास है। सारस्वत के इस पत्र के बाद प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
कोरोना काल के दौरान सभी विद्यालय बंद थे। इस दौरान सरकार ने पहले गेहूं व चावल, बाद में तेल व मसाले इस तरह छह चरणों में 1 से 5 वीं तक 461 रुपए प्रति पैकेट तथा कक्षा 6 से 8वी तक के बच्चों के अभिभावकों को 676 रुपए प्रति पैकेट बांटे थे। इनमें से कई पैकेट तो बांटे ही नहीं गए थे। इसके कारण वह खराब हो गए थे। कुछ में मिलावट होने की शिकायत भी आई थी।
Published on:
17 Mar 2026 08:59 am
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