परिजन तक नहीं देते कंधा, सभी क्रिया करते है तीन कर्मचारी
सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
देश में सबसे पहले कोरोना के हॉटस्पॉट बने भीलवाड़ा में फिर से हालात खराब हो चुके हैं। अब तक सौ कोरोना संक्रमितों की मौतें हो चुकी है। एक भयानक सच यह सामने आया है कि शहर के जो श्मशान है उनमें भी अब इंतजार के बाद अंतिम संस्कार करने का मौका मिल रहा है। राजस्थान पत्रिका ने शहर के प्रमुख पंचमुखी मोक्षधाम में पिछले तीन माह में हुए अंतिम संस्कार के आंकड़ों को खंगाला तो हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। सितंबर माह अब तक ६८ लोगों की मौत हो चुकी है। शहर का प्रमुख पंचमुखी में सितंबर माह में १४१ दांह संस्कार हो चुके है। इनमें से ५७ लोगों के शव कोरोना संक्रमित है। स्थिति यह है कि एक दिन में ९ शव यहां आए है।
२८ दिन में १४१ जने के अन्तिम संस्कार
भीलवाड़ा में मौतों का सिलसिला जारी है। मरने वालों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। पंचमुखी मोक्षधाम के अनुसार जुलाई में ३६ जनों का दाहं संस्कार हुआ उनमें से २ कोरोना संक्रमित थे। अगस्त में आंकड़ा बढ़कर ५५ तक पहुंचा तो कोरोना संक्रमित शव ७ आए, लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि २८ सितंबर सुबह तक १४१ शव दाह संस्कार के लिए आए। उनमें से ५७ बॉडी कोरोना संक्रमित थी। १९ अगस्त व ५ सितंबर को ५-५ तथा १९ सितंबर को एक साथ ९ शव कोरोना संक्रमित के आए है।
परिजन नहीं मोक्षधाम के कर्मचारी देते है कंधा
पंचमुखी मोक्षधाम समिति के सचिव बाबूलाल जाजू का कहना है कि कोरोना संक्रमण जितने तेजी से फेल रहा है उतना ही मौतों का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। पंचमुखी में कोरोना संक्रमित की बॉडी आने के बाद सभी तैयारी वहां के तीन कर्मचारी करते है। साधारण मौत पर समाज के अगवा लोग लकड़ी जमाने का काम करते है, लेकिन कोरोना संक्रमण के मामले में कोई भी लकड़ी जमाने के लिए तैयार नहीं है। यहां तक की कंधा भी नहीं देते है। ऐसे में वहां काम कर रहे राकेश पोखर, देवराज व बन्टी ही पीपीई किट में यह काम देख रहे है। कपाल क्रिया भी यहीं करते है। राकेश पोखर ने बताया कि परिवार के लोग बॉडी को हाथ तक नहीं लगाते है। कभी-कभी चेहरा दिखाने के लिए कहते है तो प्लास्टिक पर हल्का कट लगाकर चेहरा दिखा देते है, लेकिन वह भी तीन-चीर मीटर की दूरी से ही। राकेश का कहना है कि कई बार से बॉडी को अस्पताल से लाने का काम भी उन्हीं को करना पड़ता है।
अन्य मोक्षधाम में भी पहुंच रहे संक्रमित
यह एक सच्चाई केवल पंचमुखी मोक्षधाम की है। इसके अलावा शहर के शास्त्रीनगर, आजादनगर, गांधीनगर, टंकी के बालाजी, कब्रिस्तान समेत एक दर्जन मोक्षधाम में भी यही हालाक बने हुए है।
चिकित्साकर्मियों में भय का माहौल
महात्मा गांधी जिला अस्पताल के कई डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। उनके परिवार तक भी इसकी आंच पहुंच चुकी है। ऐसे में कर्मचारी कोविड वार्ड से ड्यूटी हटवाना चाहते हैं। इसमें भी कुछ कर्मचारी राजनीतिक हस्तक्षेप कराकर वार्डों में ड्यूटी लगा रहे है। ओपीडी में जरुरत से ज्यादा कर्मचारी लगे हुए हैं।
प्रदेश में प्रसिद्ध है पंचमुखी मोक्षधाम
राजस्थान का यह पहला भीलवाड़ा जिला है जहां पंचमुखी मोक्षधाम न लगकर वह एक उद्यान लगता है। मोक्षधाम में एक ही उद्ेश्य लेकर काम किया जा रहा है कि हरियाली व स्वच्छता। इसे लेकर लम्बे समय से पंचमुखी मोक्षधाम समिति के सचिव बाबूलाल जाजू व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल, लक्ष्मीनारायण डाड समेत अन्य समाजसेवी जुड़े हुए है। इस मोक्षधाम की तर्ज पर शास्त्रीनगर, गांधीनगर के मोक्षधाम का विकसित किया गया है।