Bad system in Bhilwara यदि आप शहर की सड़कों से गुजर रहे है तो वाहन चलाते समय खास सावधानी बरते। शहर के कई इलाकों में सड़क की गलत डिजाइन और खामियों के चलते कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। शहर की सड़कों पर कहीं डिवाइडर गलत बने है तो कहीं सर्किल। कहीं डिजाइन गलत होने से यातायात बेतरतीब रहता है। सड़कों के किनारे लगने वाली चौपाटियां भी हादसे का सबब बन रही है। पत्रिका टीम ने शहर की विभिन्न सड़कों का अवलोकन किया तो उनमें कई तरह की खामियां मिली।
जयप्रकाश सिंह
Bad system in Bhilwara यदि आप शहर की सड़कों से गुजर रहे है तो वाहन चलाते समय खास सावधानी बरते। शहर के कई इलाकों में सड़क की गलत डिजाइन और खामियों के चलते कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। शहर की सड़कों पर कहीं डिवाइडर गलत बने है तो कहीं सर्किल। कहीं डिजाइन गलत होने से यातायात बेतरतीब रहता है। सड़कों के किनारे लगने वाली चौपाटियां भी हादसे का सबब बन रही है। पत्रिका टीम ने शहर की विभिन्न सड़कों का अवलोकन किया तो उनमें कई तरह की खामियां मिली। कई जगह सड़क की डिजाइन ही गलत पाई गई।Bad system in Bhilwara
शहर में सबसे ज्यादा यातायात चित्तौड़ रोड पर अजमेर चौराहे से रामधाम चौराहे तक रहता है। यहां करीब तीन किलोमीटर लम्बी सड़क पर यातायात की कई खामियां देखने को मिली। रेलवे ओवरब्रिज से साबुन मार्ग रेलवे अंडर ब्रिज तक सड़क की डिजाइन में अनेक खामियां है। मेवाड़ मिल के सामने मंदिर से लेकर सर्किट हाउस तक एक तरफ की सड़क काफी चौड़ी और दूसरी तरफ की सड़क संकरी है। सर्किट हाउस के सामने लेकर रेलवे फुट ओवरब्रिज तक डिवाइडर की डिजाइन बहुत गलत है। यहां पर अजमेर पुलिया की तरफ जाने के लिए डिवाइडर से दो सड़क बना दी गई। इससे वाहन चालक भ्रमित होते रहते है और दोनों ही सड़क से वाहन अजमेर पुलिया की तरफ जाते है, ऐसे में सामने से आ रहे वाहन से टकराने की आशंका रहती है।
सर्किट हाउस तिराहे पर गलत मोड़
चित्तौड़ की तरफ आने वाले इस रोड पर सर्किट हाउस तिराहे पर गलत मोड़ है। इस रोड पर चलते-चलते वाहन तिराहे पर आने के बाद समानान्तर सड़क की तरफ अचानक मुड़ जाते है, ऐसे में समानान्तर सड़क पर चल रहे वाहनों से हादसे का खतरा बना रहता है। यहां तिराहे पर बनी गुमटी के दोनों तरफ से वाहन गांधी नगर की तरफ मुड़ते हैं, इस तरह गांधी नगर की तरफ से आने वाले भी चित्तौड़ की तरफ जाने के लिए गुमटी के दोनों तरफ से निकलते हैं।
यहां डिवाइडर ही नहीं
चित्तौड़ रोड पर रेलवे फुट ओवरब्रिज के सामने से लेकर साबुन मार्ग ओवरब्रिज तक रोड पर डिवाइडर ही नहीं है। ऐसे में यहां यातायात का दबाव चैनेलाइज नहीं हो पाता। डिवाइडर नहीं होने से दोनों तरफ से आने-जाने वाले वाहन पूरी सड़क को कवर कर लेते है, वे गलत दिशा से सामने आ जाते है या आगे चल रहे वाहन को ओवरटेक करके निकलने की कोशिश करते है, ऐसे में अक्सर जाम के हालात बन जाते हैं। इंजीनियरों के अनुसार इस हिस्से में ट्रेफिक को चेनेलाइज करने के लिए डिवाइडर बनाया जाना जरूरी है।
अंडरब्रिज खतरनाक
चित्तौड़ रोड पर साबुन मार्ग पर बना अंडरब्रिज भी खतरनाक है। यहां अंडर ब्रिज से तेज गति से वाहन रोड आते है, जिसके कई बार रोड पर आने-जाने वाले वाहनों से टकराने का अंदेशा बना रहता है। इंजीनियरों के अनुसार अंडरब्रिज का मोड़ भी यातायात की दृष्टि से बहुत खतरनाक है।
भ्रम की स्थिति होने से बढ़ रही दुर्घटना
भीलवाड़ा देश के प्रमुख शहरों में शुमार है, लेकिन यहां प्रमुख मार्गों व चौराहों के सर्किल व क्रासिंग मार्ग वाहनों के बढ़ते दबाव के अनुरूप नहीं है। चौराहों के डायवर्जन भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं, व्हाइट लाइन या जेब्रा क्रासिंग नहीं होने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। राहगीरों सुरक्षित नहीं चल पा रहे है। जिम्मेदार एजेंसी व प्रशासन को इस तरफ गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
- एसएस. गंभीर, रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता, यूआईटी
तकनीकी सर्वे की जरूरत
शहर में वाहनों के दबाव क्षेत्र एवं प्रमुख सर्किलों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। सर्वे के आधार पर ऐसे मार्गों का चिन्हीकरण किया जाएगा। उच्च अधिकारियों के मार्ग दर्शन में तकनीकी एक्सपर्ट की रायशुमारी से कार्य योजना बनाई जा कर उस पर कार्य करवाया जाएगा।
- संजय माथुर, अधीक्षण अभियंता, यूआईटी