बारिश की आड़ में छोड़ा जा रहा केमिकल युक्त जहरीला पानी हमीरगढ़ व मंगरोप क्षेत्र के 50 गांवों के ग्रामीण आक्रोशित
चित्तौड़ रोड स्थित कुछ प्रोसेस हाउस संचालकों पर आरोप है कि वे बारिश की आड़ में रात के समय बनास नदी में केमिकल युक्त जहरीला पानी छोड़ रहे हैं। इससे हमीरगढ़ और मंगरोप क्षेत्र के ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। बुधवार को ग्रामीणों ने जिला कलक्ट्रेट के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों की मुख्य मांगें
प्रदूषण फैलाने वाले प्रोसेस हाउसों को तुरंत बंद किया जाए। जांच के लिए कमेटी गठित की जाए। दोषी प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन से पहले हुई ग्रामीणों की सभा
ग्रामीण बुधवार सुबह कीरों की झोपड़ियां के पास कन्या खेड़ी बहाले स्थित हनुमान मंदिर पर एकत्र हुए। वहां से रैली के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे और नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि बनास नदी उनके लिए जीवनदायिनी है। लगभग 50 गांव कीरों की झोपड़ियां, टापरिया खेड़ा, हमीरगढ़, स्वरूपगंज, दर्री झोपड़ियां, मूणपुरा, बराठिया, कल्याणपुरा, रेबारियों की झोपड़ियां और गुवारड़ी की खेती, पीने का पानी और पशुओं की जिंदगी इसी नदी पर निर्भर है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्रोसेस हाउस संचालक कीरों की झोपड़ियां और गुवारड़ी नाले में जहरीला पानी छोड़ रहे हैं। इससे खेत और कुओं का पानी पूरी तरह खराब हो गया है।
अंडरग्राउंड पाइपलाइन से छोड़ा जा रहा जहरीला पानी
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रोसेस हाउसों ने तो अंडरग्राउंड पाइपलाइन डाल रखी है। इससे सीधे नदी में प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है। साथ ही प्रोसेस हाउस की चिमनियों से कोयले की चूरी उड़कर आसपास की फसलों को नुकसान पहुंचा रही है और लोगों में अस्थमा जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं।
शिकायतें बेअसर
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी वे तहसीलदार, थानाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण मंडल को कई बार शिकायत कर चुके हैं। लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। जब भी बारिश होती है, प्रोसेस हाउस संचालक प्रदूषित पानी नालों व नदी में छोड़ देते हैं। ग्रामीणों की पीड़ा है कि दो दिन पूर्व हमने कुछ प्रोसेस हाउस संचालकों को समस्या बताई थी, लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया। अब भी हमीरगढ़, कीरों की झोपड़ियां, टापरिया खेड़ा और आसपास के लोग नुकसान झेल रहे हैं।