सौंदर्यकरण के नाम पर भयंकर लापरवाही, किसी खूनी फंदे से कम नहीं चौराहा, क्या किसी की जान जाने का इंतजार कर रहा प्रशासन
भीलवाड़ा शहर के विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर लोगों की जान से कैसे खिलवाड़ किया जाता है, इसका जीता-जागता और खौफनाक उदाहरण कृषि उपज मंडी स्थित छोटा सर्कल है। यह चौराहा अब आमजन के लिए किसी खूनी फंदे से कम नहीं रह गया है। सर्कल के चारों ओर सजावट के नाम पर लोहे के तिकोने और बेहद नुकीले भाले लगा दिए गए हैं। यह इतनी भयंकर लापरवाही है कि यदि कोई दुपहिया वाहन चालक जरा सा भी अनियंत्रित होकर यहां गिर जाए, तो ये भाले उसके शरीर के किसी भी हिस्से में घुसकर जान ले सकते हैं या हमेशा के लिए आंखों की रोशनी छीन सकते हैं।
महेश स्कूल व मंडी चौराहे पर बने इस सर्कल पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी है। तरणताल की ओर जाने वाले और अजमेर तिराहे से आने वाले वाहन चालक बिना किसी नियम के, अपनी मर्जी से बेतरतीब ढंग से निकलते हैं। रही-सही कसर अतिक्रमण ने पूरी कर दी है। सर्कल के पास चौराहे के हर कोने पर फल वालों के ठेले खड़े रहते हैं। इसके अलावा मंडी में आने वाले किसान भी अपनी उपज से लदे वाहन सड़क किनारे ही खड़े कर देते हैं। इससे यहां हर समय जाम और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
जानलेवा होने के साथ-साथ यह सर्कल अब पोस्टर वार का भी बड़ा अड्डा बन चुका है। वर्तमान में यहां एक दर्जन से अधिक पोस्टर व बैनर लगे हुए हैं। हर कोई इसे मुफ्त प्रचार का माध्यम मान बैठा है। इससे शहर की सुंदरता तो दागी हो ही रही है, साथ ही नगर निकाय को भी राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि नगर विकास न्यास और नगर निगम के अधिकारी इस मार्ग से रोजाना गुजरते होंगे, लेकिन न तो वे इन जानलेवा भालों को हटाने की जहमत उठा रहे हैं और न ही अवैध पोस्टर लगाने वालों पर कोई जुर्माना वसूल रहे हैं।
आखिर शहर की यातायात व्यवस्था और आमजन की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाला जिला प्रशासन मौन क्यों है? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के होने या किसी बेगुनाह की जान जाने का इंतजार कर रहा है।