
भीलवाड़ा। राजस्थान के खनन पट्टाधारकों के लिए राज्य सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए बड़ी राहत दी है। खान एवं पेट्रोलियम विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब मेजर मिनरल (प्रधान खनिज) के पट्टाधारक अपने लीज क्षेत्र में निकलने वाले माइनर मिनरल (अप्रधान खनिज) को भी अपनी मौजूदा लीज में शामिल करवा सकेंगे। सरकार ने 'राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम, 2017' में संशोधन करते हुए 'राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत (तृतीय संशोधन) नियम, 2026' लागू कर दिए हैं।
राजस्थान सरकार की ओर से जोड़े गए नए नियम 26सी के तहत पट्टाधारकों को कई नियमों का पालन करना होगा। लीज क्षेत्र में ओवरबर्डन या साधारण मिट्टी के अलावा कोई भी नया माइनर मिनरल मिलने पर पट्टाधारक को 30 दिन के भीतर संबंधित खनि अभियंता या सहायक खनि अभियंता को इसकी सूचना देनी होगी। जब तक इस नए खनिज को आधिकारिक तौर पर माइनिंग लीज में शामिल नहीं कर लिया जाता, तब तक पट्टाधारक इसका खनन या निस्तारण नहीं कर सकेगा
पट्टाधारकों की सुविधा के लिए प्रक्रिया को समयबद्ध किया गया है। पट्टाधारक को खनिज शामिल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। खनि अभियंता आवेदन मिलने के एक महीने के भीतर अपना प्रस्ताव निदेशालय को भेजेंगे। निदेशालय की ओर से भारतीय खान ब्यूरो (आईबीएम) से परामर्श करने के बाद एक महीने के भीतर प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। सरकार प्रस्ताव प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर खनिज को लीज में शामिल करने की अनुमति देगी। यदि सरकार आवेदन अस्वीकृत करती है, तो उसके कारणों को लिखित में दर्ज कर आवेदक को सूचित किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत सरकार ने राजस्व के लिए वित्तीय शर्तें भी तय की हैं। पट्टाधारक को माइनर या मेजर मिनरल में से जिसका भी 'डेड रेंट' अधिक होगा, उसका भुगतान करना होगा। प्रत्येक खनिज के लिए अलग-अलग डेड रेंट नहीं वसूला जाएगा। मौजूदा डेड रेंट या नए शामिल होने वाले खनिज के डेड रेंट दोनों में से जो भी अधिक हो, की दोगुनी राशि 'वन टाइम प्रीमियम' के रूप में जमा करवानी होगी। यह प्रीमियम राशि पट्टाधारक द्वारा देय डेड रेंट या रॉयल्टी में समायोजित नहीं की जाएगी। पट्टाधारक को समय-समय पर संशोधित अनुसूची II के अनुसार रॉयल्टी और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) तथा राजस्थान स्टेट मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (आरएसएमईटी) फंड में भी तय दरों के अनुसार अंशदान देना होगा।
इस संशोधन के जरिए सरकार ने राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम, 2017 के नियम 12 के उप-नियम (6) और नियम 52 के उप-नियम (2) को भी विलोपित (हटा) कर दिया है।