Bhilwara Irrigation Department careless काछोला खेराड क्षेत्र का कुंडिया बांध दुर्दशा का शिकार हो रहा है। चार दशक पूर्व बने बांध की प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग सुध ले तो यह क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो सकता है।
Bhilwara Irrigation Department careless काछोला खेराड क्षेत्र का कुंडिया बांध दुर्दशा का शिकार हो रहा है। चार दशक पूर्व बने बांध की प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग सुध ले तो यह क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो सकता है। काछोला से तीन किलोमीटर दूर राजगढ़ पंचायत का एकमात्र सिंचाई और पेयजल का सबसे बड़ा स्रोत बांध के डाउनस्ट्रीम में छेद होने से पानी का रिसाव हो रहा है। पाल भी क्षतिग्रस्त है।Bhilwara Irrigation Department careless
ऐसे में वर्षो से बांध के पूर्ण रूप से भरने में यह बाधक बने हुए है। बांध से सालभर पानी रिसता रहता है। क्षेत्र के किसान बांध को कुंडिया खाल के नाम से भी जानते हैं। बांध की नहरे कहीं कच्ची है तो कहीं पक्की। नहरें मरम्मत के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रही है।
गेट पर लगा है जंग
बांध के निर्माण के बाद बजट नहीं मिलने से इसकी मरम्मत नहीं हो सकी। इससे बांध में लगे गेट जंग खा रहे है। बांध के ओवरफ्लो होने पर इसे खोलने की नौबत आई तो अधिकारियों की सांसें फूल सकती है। बारिश के समय हर बार समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जंग लगने के कारण गेट अटक जाते है । वर्ष.2010 में अच्छी वर्षा के कारण बांध भरा था। वर्ष.2006 के बाद बांध 2010-11 में लबालब हुआ। उसके बाद अकाल के कारण जीरो लेवल से ऊपर नहीं आ पाया। वर्ष.2014 में पानी की आवक हुई, लेकिन रपट की मरम्मत के अभाव में पानी रिसाव के बाद रुक नहीं पाया। इससे सिंचाई के दौरान टेल तक के गांवों के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पाया।
बन सकता वरदान
बांध का पानी अन्य नदी नालों में बहकर चला जाता है। इससे यह हर साल खाली रह जाता है। बांध की मरम्मत को लेकर ग्रामीणों ने कई बार क्षेत्र में लगने वाले शिविर में भी मामले को प्रमुखता से उठाया था। लेकिन इस समस्या का समाधान नहीं हो पाया। काछोला व राजगढ़ पंचायत के बांध से 15.-16 गांव को सिंचाई के लिए पानी मिलता है। इसमें प्रमुख रूप से पीथास, खाखुंदा, काछोला, राजगढ़,लक्ष्मीपुरा, बागथला व लछीमपुरा समेत कई गांव शामिल है।
इनका कहना है
कुंडिया बांध के मरम्मत एवं सुधार के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेज रखा है। बजट मिलने पर बांध व नहरों की मरम्मत हो सकती है। नरेगा एक्शन प्लान के दौरान भी प्रस्ताव भेज रखा है ।
- कैलाश चंद्र धाकड़, सहायक अभियंता, जल संसाधन विभाग