- दो साल की पढाई के बाद मांग रहे स्कूल फीस, जमा न कराने पर निकाल रहे छात्रों को - शिक्षा विभाग ने शिकायतों के बाद कई स्कूलों को थमाए नोटिस
Bhilwara news : शिक्षा का अधिकार (आरटीई) आरटीई के तहत सत्र 2025-26 के प्री-प्राइमरी कक्षाओं में एडमिशन नहीं देने पर कई निजी स्कूलों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है। अभिभावकों की शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस देकर चेताया। इसके बावजूद मनमानी जारी रहती है तो संबंधित स्कूलों की मान्यता समाप्त का प्रस्ताव निदेशालय बीकानेर भिजवाए जाएंगे। मामले में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी ने शहर के कुछ निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
रद्द हो सकती मान्यता
एडीपीसी रामेश्वर प्रसाद जीनगर ने बताया कि विभाग की ओर से संबंधित स्कूलों को पत्र के माध्यम से नोटिस जारी किए हैं। इसका जवाब स्कूल प्रबंधन को निर्धारित अवधि में देना होगा। यदि, जवाब संतोषजनक नहीं हुए तो संबंधित स्कूल के खिलाफ आरटीई एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। विभाग की ओर से संबंधित स्कूलों में जांच दल भेजे जाएंगे। दल के सदस्य एसआर नम्बर, आरटीई के रजिस्टर, आरटीई मान्यता, आवेदन क्रमांक सहित कई दस्तावेज खंगालेंगे। इनमें खामियां मिलने पर रिपोर्ट तैयार कर 1993-8बी व आरटीई एक्ट 2009 के तहत मान्यता रद्द की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बीकानेर निदेशालय को भेजेंगे।
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी जारी
जिले में करीब एक हजार से अधिक निजी स्कूल आरटीई में पंजीकृत हैं। अधिकतर निजी स्कूलों ने चयनित बच्चों को प्री-प्राइमरी कक्षाओं (नर्सरी से एलकेजी) में एडमिशन दिए हैं, लेकिन शहर के कुछ निजी स्कूल प्रवेश नहीं दे रहे। जबकि सरकार ने चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश देने के आदेश दिए हैं। इसके बावजूद निजी स्कूल मनमानी कर रहे। कई स्कूल संचालक दो साल की पढाई के बाद अभिभावकों से स्कूल फीस तक मांग रहे। फीस जमा न कराने पर छात्र को स्कूल से बाहर निकाल रहे है।
स्कूल यह बना रहे बहाना
शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि निजी स्कूलों की ओर से प्री-प्राइमरी कक्षाओं में आरटीई के विद्यार्थियों को एडमिशन नहीं देने की लगातार शिकायतें आ रही है। इनमें स्कूलों की ओर से अभिभावकों से फीस मांगने, वरियता होने के बावजूद दाखिला न देने, कागजों में कमियां निकालकर बहाने मनाने, शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाने समेत कई शिकायतें शामिल हैं। नोटिस जारी करने के बाद कुछ स्कूलों ने तो एडमिशन दिए, लेकिन कुछ स्कूल बहाने बनाकर अभिभावकों को टाल रहे हैं। स्कूल प्रबंधक कई तरह का बहाना बना कर प्रवेश देने से मना कर रहे जबकि 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए आरक्षित हैं।