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फर्जी दिव्यांगता पर प्रहार: 87 शिक्षाकर्मियों की होगी दोबारा जांच

फर्जी दिव्यांगता पर प्रहार: 87 शिक्षाकर्मियों की होगी दोबारा जांच -मेडिकल बोर्ड के सामने होना होगा पेश

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Attack on fake disability: 87 education workers will be re-examined Send feedback Side panels History Saved

Attack on fake disability: 87 education workers will be re-examined Send feedback Side panels History Saved

शिक्षा विभाग में दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्तियां और अन्य लाभ लेने वाले कार्मिकों पर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। संयुक्त निदेशक (स्कूल शिक्षा) अजमेर संभाग ने एक आदेश जारी कर संभाग के 87 शिक्षकों और अन्य कार्मिकों की दिव्यांगता की पुन: जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इन सभी कार्मिकों को अजमेर के जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय में गठित विशेष मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना होगा।

अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर और टोंक के कार्मिक रडार पर

संयुक्त निदेशक डॉ. महावीर कुमार शर्मा की ओर से जारी सूची में अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, ब्यावर, केकड़ी, शाहपुरा, डीडवाना-कुचामन और टोंक जिले के कार्मिक शामिल हैं। सूची में प्रिंसिपल्स, लेक्चरर, सीनियर टीचर और यूडीसी स्तर के कार्मिकों के नाम हैं, जिनकी दिव्यांगता संदिग्ध मानी जा रही है।

5 से 15 जनवरी तक चलेगा जांच अभियान

मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थिति के लिए विभाग ने विस्तृत शेड्यूल जारी किया है। इसमें प्रथम चरण 5 से 7 जनवरी तक अजमेर और भीलवाड़ा के प्रारंभिक सूचकांक वाले कार्मिक। दूसरे चरण में 8 से 10 जनवरी तक नागौर और अन्य जिलों के शिक्षक। अंतिम चरण 13 से 15 जनवरी तक डीडवाना-कुचामन, टोंक और शेष कार्मिकों की जांच होगी।

नियमों में सख्ती, अवकाश होंगे निरस्त

आदेश में साफ निर्देश दिए है कि यदि किसी कार्मिक ने पूर्व में अवकाश स्वीकृत करवा रखा है, तो उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त माना जाएगा। कार्मिकों को अपने मूल दस्तावेज और 300 रुपए शुल्क के साथ निर्धारित तिथि पर उपस्थित होना अनिवार्य है।

अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी

आदेश में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों और संस्था प्रधानों को पाबंद किया गया है कि वे संबंधित कार्मिक को कार्यमुक्त कर उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। लापरवाही बरतने या उपस्थित नहीं होने की स्थिति में संबंधित के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।