जिले में अगले माह ग्राम सेवा सहकारी समितियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है। प्रदेश में जुलाई में चुनाव करवाए जाने प्रस्तावित है। चुनाव को लेकर वार्डो के आरक्षण तय किए जा रहे हैं।
जिले में अगले माह ग्राम सेवा सहकारी समितियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई है। प्रदेश में जुलाई में चुनाव करवाए जाने प्रस्तावित है। चुनाव को लेकर वार्डो के आरक्षण तय किए जा रहे हैं। जिले में 376 ग्राम सेवा सहकारी समितियों में से 366 के चुनाव होंगे। जबकि 5 समितियों का समय पूरा नहीं होने से चुनाव वर्ष 2023 में हो सकते है। विभाग की ओर से 352 समितियों में वार्डो का गठन कर दिया गया है।
उप रजिस्ट्रार अरविन्द ओझा ने बताया कि समितियों के काश्तकारों के आधार पर वार्ड का अलग से गठन किया गया है। प्रत्येक ग्राम सेवा सहकारी समिति में अधिकतम 12 वार्ड बनाए जाएंगे। वार्डों का आरक्षण वर्तमान कमेटी द्वारा लॉटरी के माध्यम से तय किया जा रहा है। एक- एक वार्ड एससी-एसटी, 2 वार्ड महिला और शेष वार्ड सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। प्रत्येक समिति में 12 संचालक मंडल के सदस्य चुने जाएंगे। 12 सदस्यों में से ही एक अध्यक्ष ऋणी सदस्यों से चुना जाएगा। ऋणी सदस्य का मतलब ऐसे सदस्य से है जिसने संस्था से पिछले तीन वित्तिय वर्षो की अवधि में कम से कम एक बार नकद या कृषि आदान के रूप में ऋण लिया हो।
ग्राम सेवा सहकारी समितियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वार्डों का आरक्षण लॉटरी से तय किया जाएगा। तैयारियों को लेकर मंगलवार को वीसी होगी। इसमें चुनाव को लेकर चर्चा होगी। मुख्यालय की ओर से चुनाव की तैयारी को लेकर रिपार्ट मांगी है। हालांकि अभी तक चुनाव का कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। लेकिन मुख्यालय स्तर पर चुनाव को लेकर तैयारिया शुरू हो चुकी है।
ग्राम सेवा सहकारी समितियां गांवों में मिनी बैंक की तर्ज पर कार्य करती है। किसानों को खाद-बीज इन समितियों के माध्यम से ही उपलब्ध करवाया जाता है। सरकार की भी प्राथमिकता रहती हैं कि किसानों को कृषि आदान समितियों के माध्यम से गांव में ही उपलब्ध करवाया जाए। ग्रामीणों को अल्पकालीन फसली ऋण वितरण करने का काम भी ग्राम सेवा सहकारी समिति के माध्यम से होता है। विभिन्न समितियों के माध्यम से कृषि जिंसों की समर्थन मूल्य पर खरीद भी की जाती है। समिति के लाभांश का फायदा भी किसानों को ही दिया जाता है। इसी कारण समितियों में नेतृत्व को लेकर किसानों को खासा रुझान देखा जाता है।