- राइजिंग राजस्थान के तहत भीलवाड़ा में हुए थे 275 करोड़ के एमओयू, जयपुर में आज होगी बैठक - भीलवाड़ा में मक्का की बंपर पैदावार, पंजाब व हरियाणा के पोल्ट्री फार्म जा रहा
Bhilwara news : राइजिंग राजस्थान के तहत भीलवाड़ा में हुई इंवेस्टमेंट समिट में एग्रो फूड व एथेनॉल प्लांट के लिए एमओयू हुए थे। भीलवाड़ा के उद्यमियों ने तीन अलग-अलग प्लांट लगाने के लिए करीब 275 करोड़ के एमओयू किया था। लेकिन जमीन नहीं मिलने से यह एमओयू धरातल पर नहीं उतर पा रहे है। हालांकि इस मामले को लेकर बुधवार सुबह 11.30 बजे जयपुर में एक बैठक होगी। इसमें भीलवाड़ा के उद्यमी भी हिस्सा लेंगे।
एथेनॉल प्लांट, मिलेट व फूड पार्क के लिए एमओयू करने वाले उद्यमी महादेव गुर्जर ने बताया कि भीलवाड़ा में हुए कार्यक्रम के तहत तीन एमओयू किए थे। इसमें करीब 275 करोड़ रुपए व्यय होंगे। लेकिन अभी तक जमीन नही मिली है। इसे लेकर जयपुर से निधि गुप्ता की ओर से मैसेज आया कि बुधवार को जयपुर में पीएचएम के निदेशक एचएस मिश्रा की अध्यक्षता में बैठक होगी। इसमें जमीन के मामले को लेकर उद्यमियों से चर्चा की जाएगी।
बाहर जा रहा मक्का
गुर्जर ने बताया कि मक्का की कीमत अभी 30 रुपए किलो है। लेकिन किसानों को इसका फायदा नहीं मिल रहा। यह सभी मक्का अन्य राज्यों पंजाब व हरियाणा के पोल्ट्री फार्म जा रहा है।
125 करोड़ एथेनॉल प्लांट
गुर्जर ने बताया कि एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर फ्यूल में इस्तेमाल किया जाता है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने की फसल से होता है, लेकिन मक्का, चावल से भी एथेनॉल तैयार किया जा सकता है। एथेनॉल उत्पादन में सबसे आगे उत्तर प्रदेश है। बिहार व मध्यप्रदेश में भी उत्पादन हो रहा है। भीलवाड़ा-शाहपुरा, चित्तौड़गढ़- निम्बाहेड़ा जिले में बड़ी मात्रा में मक्का का उत्पादन होता है। यह मक्का बाहर जा रहा है। एथेनॉल प्लांट होगा तो मक्का स्थानीय स्तर पर काम आएगा। किसानों को भी फायदा होगा। इस प्लांट की लागत 125 करोड़ आएगी।
50 करोड़ का मिलेट प्लांट
आमतौर पर लोग मिलेट का मतलब ज्वार और बाजरा समझते हैं। मिलेट्स की कैटेगरी में और भी बहुत से अनाज आते हैं। इसमें रागी, कांगणी, सावा, ओदरा, अलावा कलमी, चेना, कुर्थी (कुलथी), कोदो, जंगोरा वगैरह सब मिलेट्स हैं। इनके अलावा कुछ सूडो मिलेट्स भी होते हैं, जैसे रामदाना। इसे हम चोलाई भी बोलते हैं। इस प्लांट के माध्यम से इन उपज से बिस्कुट समेत अन्य हेल्दी खाद्य सामग्री का उत्पादन होगा। इसकी लागत 50 करोड़ आएगी।
100 करोड़ का फूड पार्क
गुर्जर ने बताया कि 100 की लागत से फूड पार्क विकसित किया जाएगा। फ़ूड पार्क, खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए बुनियादी ढांचा होता है। मेगा फ़ूड पार्क, किसानों, प्रोसेसर और खुदरा विक्रेताओं को एक साथ लाकर कृषि उत्पादों को बाज़ार से जोड़ता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और रोज़गार के अवसर मिलेंगे। वर्तमान में फ़ूड पार्क अजमेर में है और पांच फ़ूड पार्क अलवर, कोटा, जोधपुर, और श्रीगंगानगर में हैं।