35 हजार 794 शिक्षक होंगे प्रभावित
BHilwara news : प्रदेश में 35 हजार 794 शिक्षकों को लेकर विभाग की ओर से जारी गाइड लाइन के अनुसार ही अधिशेष शिक्षकों का पदस्थापन किया जाएगा। इस बार निदेशालय ने अधिशेष शिक्षकों को पदस्थापन देने के लिए किसी प्रकार की काउंसलिंग नहीं करने का फैसला किया है। कोई शिक्षक एवं कार्मिक विशेष योग्य है, तो मंडल स्तर पर ही कोई व्यवस्था की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक आशीष मोदी ने प्रदेश के सभी शिक्षा अधिकारियों को अधिशेष शिक्षकों के समायोजन को लेकर 11 नवंबर को जारी गाइड लाइन के अनुसार ही काम करने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ कार्मिक का रखा जाएगा ध्यान
गाइड लाइन के अनुसार, शहरी क्षेत्र के शिक्षकों को शहर में और ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों का ग्रामीण क्षेत्र में ही पदस्थापन किया जाएगा। इसके अलावा न्यायिक प्रकरण में स्थगन प्राप्त शिक्षक एवं कार्मिक को अधिशेष नहीं माना जाएगा। इस कारण से संबंधित पद पर अन्य पदस्थापित शिक्षक तथा कार्मिक अधिशेष होंगे। साथ ही विद्यालय में कार्मिकों की कार्यग्रहण तिथि के आधार पर वरिष्ठ कार्मिक का समायोजन उसी विद्यालय में किया जाएगा। कनिष्ठ कार्मिकों को चिन्हित कर समायोजन किया जाएगा।
इनको किया जाएगा प्रारंभिक शिक्षा में
माध्यमिक शिक्षा विभाग में समायोजन नहीं हो सकने वाले अधिशेष कार्मिक वरिष्ठ प्रबोधक, प्रबोधक, वरिष्ठ शिक्षाकर्मी, शिक्षा कर्मी, पंचायत शिक्षक, कनिष्ठ शिक्षक, पैराटीचर तथा ट्रेनी शिक्षक आदि को प्रारंभिक शिक्षा विभाग के ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में ही पदस्थापित किया जाएगा।
भीलवाड़ा में 847 शिक्षक अधिशेष
भीलवाड़ा शिक्षा विभाग के अनुसार तैयार की गई सूची में 847 अधिशेष शिक्षकों को शामिल किया गया है। इसमें भी कुछ संख्या कम ज्यादा हो सकती है। निदेशक के निर्देश के बाद अब फिर से संयुक्त निदेशक कार्यालय में सूचियों में संशोधन करना प्रारंभ कर दिया गया है।
नियमों में हो बदलाव
उधर, राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम) के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र शर्मा ने शिक्षा मंत्री, शासन सचिव (स्कूल शिक्षा) एवं निदेशक को ज्ञापन भेज कर अधिशेष शिक्षकों के समायोजन संबंधित दिशा निर्देशों में व्यवहारिक बदलाव करने की मांग की है। प्रदेश महामंत्री रामदयाल मीणा ने बताया कि शिक्षा विभाग के निदेशक ने अधिशेष शिक्षकों के समायोजन के संबंध में जो दिशा - निर्देश जारी किए हैं, उनमें कई प्रकार की विसंगतियां है। इन विसंगतियों के कारण शिक्षकों में विभागीय अधिकारियों के प्रति गहरा रोष है।