Green tax collection in Rajasthan: भीलवाड़ा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने राज्य में वाहनों से ग्रीन टैक्स' के रूप में वसूली जा रही राशि के कथित दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है।
Green tax collection in Rajasthan: भीलवाड़ा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने राज्य में वाहनों से ग्रीन टैक्स' के रूप में वसूली जा रही राशि के कथित दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने इस मामले में जहां संयुक्त जांच समिति का गठन कर 6 सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सचिव, प्रदेश के पर्यावरण एवं नगरीय विकास विभागों के प्रमुख सचिव, परिवहन आयुक्त, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सदस्य सचिव, एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक को नोटिस जारी कर पूछा है कि ग्रीन टैक्स के रूप में जमा 2009.66 करोड़ रुपए कहां खर्च किए गए? अब मामले में 23 मार्च को सुनवाई होगी।
एनजीटी की सेंट्रल ज़ोन बेंच (भोपाल) के पीठासीन अधिकारी शिवकुमार सिंह एवं सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू की याचिका पर यह आदेश दिया। संयुक्त जांच कमेटी से यह बताने को कहा गया है कि क्या ग्रीन टैक्स के रूप में जमा राशि का उपयोग वास्तव में हरियाली बढ़ाने और प्रदूषण रोकने में हुआ है या इसे अन्य कार्यों पर खर्च कर दिया गया।
याचिकाकर्ता जाजू की ओर से अधिवक्ता लोकेन्द्रसिंह कच्छावा ने बेंच को बताया कि राजस्थान में वाहनों का धुआं दमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग जैसी बीमारियां बांट रहा है। वर्ष 2017 में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रीन टैक्स लागू किया गया, लेकिन आरटीआई से खुलासा हुआ है कि 2015-16 से 2024-25 तक ग्रीन टैक्स के रूप में 2009.66 करोड़ जमा होने के बावजूद प्रदेश में वन क्षेत्र 13 प्रतिशत से घटकर 9 प्रतिशत रह गया।
जांच समिति में पर्यावरण विभाग, परिवहन विभाग, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
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