- डिजिटल क्रांति: पहली बार मोबाइल ऐप से घर-घर पहुंचेगा 'डिजिटल पेन' - दो चरणों में होगा काम; प्रगणकों को मिलेंगे 25 हजार
देश की तस्वीर और तकदीर बदलने वाले महाअनुष्ठान 'जनगणना 2027' का बिगुल बज चुका है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने जनगणना के विभिन्न घटकों के लिए वित्तीय मानदंडों और कार्ययोजना को मंजूरी दे दी है। भीलवाड़ा समेत प्रदेश में इस बार जनगणना पूरी तरह 'हाईटेक' होगी। इसमें तकनीक और मोबाइल एप्लिकेशन का व्यापक उपयोग किया जाएगा।
जनगणना का कार्य दो मुख्य चरणों में पूरा होगा। पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना अप्रेल से सितंबर तक की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी। इस बार प्रगणक और पर्यवेक्षक डेटा संग्रह के लिए अपने स्वयं के मोबाइल उपकरणों का उपयोग करेंगे। इससे आंकड़ों के शीघ्र प्रकाशन में मदद मिलेगी।
जनगणना कार्य में लगे कर्मियों के लिए सरकार ने आकर्षक मानदेय तय किया है। प्रगणक और पर्यवेक्षक इन्हें दोनों चरणों के सफल समापन के बाद कुल 25 हजार का मानदेय मिलेगा। राज्य नोडल अधिकारी को कुल 75 हजार तक का मानदेय देय होगा। अन्य अधिकारी में जिला, संभाग और उपखंड स्तर के अधिकारियों के लिए भी 30 हजार से 60 हजार रुपए तक के मानदेय का प्रावधान किया गया है।
डिजिटल जनगणना को संभालने के लिए राज्य, जिला और नगर निगम स्तर पर तकनीकी सहायकों और एमटीएस की भर्ती की जाएगी। ये नियुक्तियां जनवरी से अधिकतम 18 महीनों के लिए पूरी तरह संविदा आधार पर होंगी। तकनीकी सहायकों को 25 हजार और एमटीएस को 18 हजार रुपए प्रति माह पारिश्रमिक दिया जाएगा।
जनगणना के लिए 100 राष्ट्रीय प्रशिक्षक तैयार किए गए हैं, जो लगभग 31 लाख प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को डिजिटल डेटा संग्रह का प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में भाग लेने वालों को 600 से 900 प्रतिदिन का भत्ता भी मिलेगा।